किसानों को भुगतान में देरी पर उठाए सवाल, बारिश में भीगी फसल के नुकसान की भरपाई मांगी
गेहूं और गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि को बताया अपर्याप्त
रेवाडी, 2 नवंबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि इस सत्र में बाजरे की भावांतर योजना के तहत किसानों को भुगतान के लिए कितनी बजट राशि निर्धारित की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद शुरू हुए करीब एक माह बीतने के बावजूद किसानों को भावांतर राशि नहीं मिली है।
विद्रोही ने कहा कि सरकार किसानों को बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,950 रुपये प्रति क्विंटल सुनिश्चित करने और भावांतर योजना के तहत उनके खातों में 600 रुपये प्रति क्विंटल डालने का दावा कर रही है। उनके अनुसार, कृषि मंत्री खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान करने की बात कह रहे हैं, जबकि किसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने और अगली फसल की तैयारी के लिए तत्काल धन चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा के अनुसार बाजरे की खरीद 15 नवंबर तक होनी है। इस बीच बेमौसम बारिश में मंडियों में बिक्री के लिए लाया गया बाजरा भीगने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में बाजरे और धान को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था नहीं थी। विद्रोही ने पूछा कि इस लापरवाही से किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
विद्रोही ने दावा किया कि मौजूदा खरीद व्यवस्था में किसानों को पहले ही 50 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भीगे बाजरे की कम कीमत मिलने से यह नुकसान 50 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक हो सकता है। उन्होंने सरकार से भावांतर योजना की उपलब्ध बजट राशि और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की।
गेहूं और गन्ने के मूल्य पर भी सवाल उठाते हुए विद्रोही ने कहा कि गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि किसानों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने गन्ने के भाव में 15 रुपये की वृद्धि कर इसे 430 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने को भी अपर्याप्त बताया।
पूर्व कांग्रेस सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से 2014 के बीच गन्ने का भाव 117 रुपये से बढ़कर 310 रुपये प्रति क्विंटल हुआ था। उनके अनुसार, यह करीब 165 प्रतिशत की कुल वृद्धि थी, जबकि भाजपा सरकार के 12 वर्षों में भाव 310 रुपये से बढ़कर 430 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, जो करीब 39 प्रतिशत की कुल वृद्धि है।
विद्रोही ने कहा कि सरकार किसान हित के दावे करने के बजाय फसलों का लाभकारी मूल्य, समय पर भुगतान और बारिश से हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करे।








