सीमा पर रोके जाने के बावजूद दिल्ली रैली में पहुंचे कार्यकर्ता: कांग्रेस

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सेक्टर-29 के लेजरवैली मैदान से रवाना हुईं बसें और गाड़ियां; राज बब्बर व धर्मपाल मलिक भी रहे मौजूद

पंकज डावर बोले—संविधान और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई; वर्धन यादव ने उठाए किसानों और युवाओं के मुद्दे

गुरुग्राम। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली में रविवार को गुरुग्राम से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर और ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव के नेतृत्व में हजारों लोग रैली में पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने गुरुग्राम-दिल्ली सीमा पर उनके काफिले और बसों को रोका, जिसके बाद कई कार्यकर्ता झंडे लेकर पैदल ही दिल्ली की ओर बढ़ गए।

इससे पहले सेक्टर-29 स्थित लेजरवैली मैदान से बसों और अन्य वाहनों में कार्यकर्ता दिल्ली के लिए रवाना हुए। रवानगी के दौरान पूर्व सांसद राज बब्बर तथा पूर्व सांसद एवं रैली के गुरुग्राम प्रभारी धर्मपाल मलिक भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सीमा पर बसें रोके जाने से कार्यकर्ताओं को परेशानी हुई। कई कार्यकर्ता पैदल आगे बढ़े और कुछ समय बाद वाहन पहुंचने पर उनमें सवार होकर रैली स्थल तक गए। पंकज डावर ने पुलिस पर कार्यकर्ताओं के साथ झड़प का भी आरोप लगाया। इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।

पंकज डावर ने कहा कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे थे। उन्हें रोकने का प्रयास सरकार की बौखलाहट दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में जुटी भीड़ जनता की बदलाव की इच्छा का संकेत है। यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए राज बब्बर और धर्मपाल मलिक का आभार जताया।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव ने कहा कि पुलिस के माध्यम से कार्यकर्ताओं को रोका जा सकता है, लेकिन महंगाई और बेरोजगारी को लेकर जनता के आक्रोश को नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिलेभर से किसानों, मजदूरों और युवाओं ने रैली में भाग लेकर अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींचा है।

वर्धन यादव ने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि रैली में इन वर्गों की भागीदारी सरकार की नीतियों के प्रति उनके असंतोष को दर्शाती है।

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Author: Bharat Sarathi

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