बिजली निजीकरण पर सरकार का पीछे हटना अस्थायी: विद्रोही

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हड़ताल और जनविरोध के दबाव में फैसला टालने का आरोप; निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

रेवाड़ी, 24 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने बिजली वितरण के निजीकरण के मुद्दे पर भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली कर्मचारियों की हड़ताल और जनता के विरोध के दबाव में सरकार फिलहाल पीछे हटी है, लेकिन भविष्य में निजीकरण की दिशा में फिर कदम बढ़ा सकती है।

विद्रोही ने कहा कि बिजली संकट से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि सरकार समय रहते कर्मचारियों से बातचीत करके स्थिति को बिगड़ने से रोक सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने और फिर उसे रद्द कराने का आश्वासन देने के घटनाक्रम से सरकार की कथनी और करनी में विरोधाभास सामने आया है।

लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर सवाल

विद्रोही ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय सरकार की जानकारी और सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता था। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि निजीकरण का विरोध करने के उसके दावे के बावजूद निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।

उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार के पास इस मामले में हस्तक्षेप करने के अधिकार थे, तो शुरुआत में ही उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और पहले अदालत जाने की बात क्यों कही गई। विद्रोही के अनुसार, कर्मचारियों के व्यापक विरोध ने सरकार को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया।

अदालती विवाद की आशंका जताई

विद्रोही ने आशंका जताई कि लाइसेंस रद्द करने की दिशा में कार्रवाई होने पर संबंधित निजी कंपनी उसे अदालत में चुनौती दे सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में निजीकरण का विवाद समाप्त होने के बजाय लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकता है। उन्होंने कर्मचारियों और उपभोक्ताओं से सरकार के आगामी कदमों पर नजर रखने का आह्वान किया।

कंपनी की वित्तीय क्षमता पर जवाब मांगा

विद्रोही ने दावा किया कि इलेवन पावर की पूंजी एक करोड़ रुपये है, जबकि उससे जुड़ी बिजली वितरण व्यवस्था का मूल्य लगभग 4,700 करोड़ रुपये है। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने कंपनी की वित्तीय क्षमता और लाइसेंस देने के मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि सरकार संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करे और बताए कि उपभोक्ताओं के हितों तथा निर्बाध बिजली आपूर्ति की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

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Author: Bharat Sarathi

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