सरकारी विद्यालयों में डेस्क, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध करवाए सरकार
गरीब परिवारों के बच्चों को सम्मानजनक वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी
चंडीगढ़, 9 अक्टूबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एक ओर हरियाणा को विकसित प्रदेश बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों सरकारी विद्यालयों में बच्चे आज भी जमीन पर टाट-पट्टी बिछाकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। प्रकाशित समाचार के अनुसार प्रदेश के लगभग 14 हजार सरकारी स्कूलों में 3.80 लाख बच्चों के लिए डेस्क की व्यवस्था नहीं हो पाई है। यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अधिकांशतः गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। अनेक विद्यालयों में छात्राओं के लिए पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था न होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। बच्चों के बैठने के लिए डेस्क, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित भवन, पर्याप्त शिक्षक और छात्राओं के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार को घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय जल्द से जल्द सभी सरकारी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए, ताकि बच्चे अच्छे और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं। यदि इन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो विकसित भारत का सपना कैसे साकार होगा? कांग्रेस की नीति सदैव सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की रही है।
कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार से मांग की कि सरकारी विद्यालयों की सुविधाओं का जिलावार सर्वेक्षण करवाकर कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर किया जाए। विशेष रूप से छात्राओं के शौचालयों और बच्चों के बैठने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रगति का वास्तविक पैमाना बड़ी घोषणाएं नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधाएं हैं।








