कहा—विपक्ष की शंकाओं का जवाब आयोग दे, भाजपा क्यों दे रही सफाई
9 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता के मन में पैदा होने वाली शंकाओं का समाधान करना आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने एक मतदाता के नाते चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से सार्वजनिक सवाल किया कि उनकी जवाबदेही संविधान, देश की जनता और संसद के प्रति है या भारतीय जनता पार्टी के प्रति?
विद्रोही ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब स्वयं चुनाव आयुक्तों को देना चाहिए। उन्होंने पूछा कि जब सवाल आयोग से किए जाते हैं तो उनकी सफाई भाजपा की ओर से क्यों आती है? क्या आयोग ने भाजपा को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया है? यदि ऐसा नहीं है तो आयोग को स्वयं सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विपक्ष के सवालों का जवाब देने की मांग
विद्रोही ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री सरकार का नेतृत्व करते हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता, दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति का हिस्सा हैं, तो विपक्ष के नेता की बात सुनने और उनके सवालों का जवाब देने से परहेज क्यों किया जा रहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने को तैयार नहीं है। विद्रोही ने कहा कि यदि विपक्ष के नेता को भी अपनी शंकाएं रखने और उनका उत्तर पाने का अवसर नहीं मिलता, तो इससे आयोग की लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विद्रोही के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आयोग विपक्ष की आपत्तियों को गंभीरता से सुने और तथ्यों के साथ उनका जवाब दे। सवालों से बचने का रवैया जनता के बीच यह धारणा पैदा कर सकता है कि आयोग स्वयं को लोकतांत्रिक जवाबदेही से ऊपर मानता है।
जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी
विद्रोही ने तीखा सवाल किया कि आयोग देश की स्वतंत्र निर्वाचन संस्था के रूप में काम कर रहा है या स्वयं को भाजपा का चुनाव विभाग मान रहा है? उन्होंने कहा कि आयोग की निष्पक्षता के प्रति जनता का भरोसा स्पष्ट जवाब और पारदर्शी कार्यप्रणाली से ही मजबूत होगा।
उन्होंने दावा किया कि उनके सवाल केवल व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि भाजपा-एनडीए को वोट न देने वाली देश की लगभग 60 प्रतिशत जनता की चिंताओं को भी अभिव्यक्त करते हैं। विद्रोही ने कहा कि नागरिकों के सवालों का जवाब देना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और वह इस जवाबदेही से बच नहीं सकता।








