नायाब सरकार का गरीब विरोधी चेहरा बेनकाब-रणदीप सुरजेवाला

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निजी अस्पतालों को रियायती जमीन, गरीबों को रियायती इलाज नहीं-रणदीप

29 अस्पताल साइटों पर शर्तों के पालन का हिसाब दे सरकार : सुरजेवाला

चंडीगढ़, 15 सितंबर 2026 – कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि निजी अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन तो दे दी गई, लेकिन गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज देने की शर्त को लागू करने का कोई प्रभावी तंत्र ही नहीं बनाया गया।

सुरजेवाला ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह मामला महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के साथ खुला धोखा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में एचएसवीपी ने ईडब्ल्यूएस मरीजों को रियायत देने की नीति जारी की थी। उससे पहले भी 2016 से इस संबंध में शिकायतें दर्ज हो रही थीं। उस समय भी भाजपा और तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाला खट्टर द्वारा गरीबों को ठगा गया। इसके बावजूद आज 2026 में न तो कोई ठोस निगरानी व्यवस्था बनी और न ही यह पता चलता है कि कितने जरूरतमंद मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिला। अब फिर दोबारा से मुख्यमंत्री नायब सैनी के धोखों से गरीबों को ठगने का धंधा चल रहा है !

सुरजेवाला ने बताया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, रेवाड़ी और सोनीपत सहित विभिन्न जिलों में कुल 29 अस्पताल साइटें निजी संचालकों को इस शर्त पर आवंटित की गई थीं कि गरीब और ईडब्ल्यूएस मरीजों को मुफ्त या रियायती दरों पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन लोकायुक्त की कार्यवाही में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बना सके।

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि लोकायुक्त ने भी सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चार साल बीत जाने के बाद भी नीति का क्रियान्वयन शून्य है। उन्होंने रॉक लैंड हॉस्पिटल सहित कई मामलों का हवाला देते हुए पूछा कि शर्त पूरी न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर निजी अस्पतालों को सस्ती जमीन उपलब्ध करा रही है, दूसरी ओर आयुष्मान भारत और चिरायु हरियाणा जैसी योजनाओं के तहत कई बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित कर गरीबों को बदहाल सरकारी अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने इसे संसाधनों की बंदरबांट और गरीब-विरोधी नीति करार दिया।

सांसद रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से मांग की कि तुरंत हर रियायती जमीन वाले अस्पताल में ईडब्ल्यूएस और बीपीएल मरीजों के इलाज का सार्वजनिक रिकॉर्ड जारी किया जाए। प्रभावी निगरानी तंत्र बनाया जाए और शर्त का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्वतंत्र जांच की भी मांग की।

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Author: Bharat Sarathi

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