हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर पिछड़े और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव का लगाया आरोप
रेवाड़ी, 15 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा में प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों की भर्ती में पिछड़े तथा दलित वर्ग के योग्य उम्मीदवारों को सुनियोजित ढंग से अवसरों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा बार-बार बनाए जा रहे मनमाने नियम भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
विद्रोही ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कॉलेज कैडर के 2424 सहायक प्रोफेसर पदों की भर्ती में सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को गैर-आरक्षित पदों पर विचार नहीं करने के मामले में परिणाम दोबारा जारी करने का आदेश दिया है। उन्होंने दावा किया कि अदालत का यह आदेश बताता है कि भर्ती नियमों की गलत व्याख्या के कारण योग्य उम्मीदवारों के हित प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी यदि अपनी योग्यता और अंकों के आधार पर सामान्य श्रेणी की मेरिट में स्थान बनाता है तो उसे गैर-आरक्षित पद पर चयन का समान अवसर मिलना चाहिए। नियमों को तोड़-मरोड़कर ऐसे उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से बाहर करना संविधान में प्रदत्त समान अवसर की भावना के विपरीत है।
लगातार अदालती हस्तक्षेप पर उठाए सवाल
विद्रोही ने कहा कि इससे पहले आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी भर्ती में भी हाईकोर्ट ने आयोग के नियमों पर सवाल उठाते हुए संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। एक महीने के भीतर विभिन्न भर्ती मामलों में अदालत के हस्तक्षेप से एचपीएससी की कार्यप्रणाली और सरकार के पारदर्शी भर्ती के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले दस वर्षों से ईमानदार और पारदर्शी भर्ती का दावा करती रही है, लेकिन बार-बार सामने आ रहे विवादों तथा अदालती फैसलों से इन दावों की वास्तविकता उजागर हो रही है। पिछड़े, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के योग्य युवाओं को तकनीकी कारणों अथवा मनमाने नियमों के आधार पर बाहर करना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
विद्रोही ने मांग की कि विवादित भर्तियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, हाईकोर्ट के आदेशों को तत्काल लागू किया जाए और प्रभावित उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के अनुसार न्याय दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार और आयोग को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि भर्ती नियम किस आधार पर बनाए गए तथा उनके कारण कितने योग्य उम्मीदवार चयन से वंचित हुए।








