वर्ष 2013 से 2026 तक विज्ञापनों पर 650.94 करोड़ रुपये खर्च; गीता जयंती के प्रचार पर 26.35 करोड़ और ‘हर घर तिरंगा’ पर 1.51 करोड़ रुपये व्यय

भिवानी। हरियाणा सरकार ने विभिन्न आयोजनों और योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए कोई बजट खर्च नहीं किया। यह दावा स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने आरटीआई के तहत मिली सूचना के आधार पर किया है।
परमार के अनुसार, वर्ष 2017 से 2025 के बीच गीता जयंती महोत्सव के प्रचार पर कुल 26 करोड़ 35 लाख 18 हजार 201 रुपये खर्च किए गए। इनमें प्रिंट मीडिया पर 18 करोड़ 41 लाख 17 हजार 355 रुपये और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 7 करोड़ 94 लाख 846 रुपये का व्यय शामिल है।
आरटीआई से मिली सूचना के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2025 तक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के प्रचार पर 2 करोड़ 23 लाख 78 हजार 860 रुपये तथा वर्ष 2022 से 2025 तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर एक करोड़ 51 लाख 55 हजार 414 रुपये खर्च किए गए।
परमार ने दावा किया कि वर्ष 2013 से 2026 के बीच हरियाणा सरकार ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन जारी करने पर कुल 650 करोड़ 94 लाख रुपये खर्च किए हैं। दूसरी ओर, सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति लोगों को जागरूक करने के सवाल पर संबंधित जनसूचना अधिकारी ने बताया कि इस मद में कोई बजट खर्च नहीं किया गया।

बृजपाल सिंह परमार ने कहा कि आम नागरिक सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की कथित मनमानी के कारण अपने कार्यों तथा सूचनाओं के लिए भटकते रहते हैं। ऐसे में सूचना के अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के बजाय सरकारी प्रचार पर भारी धनराशि खर्च करना प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आंकड़ों में प्रचार खर्च
- सरकारी विज्ञापन: 650.94 करोड़ रुपये
- गीता जयंती महोत्सव: 26.35 करोड़ रुपये
- आजादी का अमृत महोत्सव: 2.23 करोड़ रुपये
- हर घर तिरंगा अभियान: 1.51 करोड़ रुपये
- आरटीआई जागरूकता: कोई खर्च नहीं








