“देश में करोड़ों मुकदमे पेंडिंग हैं, लोग 20-20 साल से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।” — नवीन जयहिंद
“न्याय देने वाला ही नहीं होगा तो न्याय कैसे मिलेगा? जजों के खाली पदों पर आखिर भर्ती क्यों नहीं हो रही?” — नवीन जयहिंद
जजों की कमी और लंबित मुकदमों को लेकर नवीन जयहिंद ने उठाए गंभीर सवाल
रोहतक, 8 सितंबर – रोहतक। कोर्ट में पेशी के दौरान नवीन जयहिंद ने देश की न्याय व्यवस्था में जजों की कमी और वर्षों से लंबित मुकदमों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी वर्षों तक न्याय की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काटता रहता है, लेकिन पर्याप्त संख्या में जज नहीं होने के कारण मामलों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा।
नवीन जयहिंद ने कहा कि देश में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं और बड़ी संख्या में मामले ऐसे हैं जो 20-20 साल से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ता है, जो अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण समय न्याय की प्रतीक्षा में गुजार देता है।
उन्होंने जजों के खाली पदों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब न्याय देने वाले पर्याप्त संख्या में उपलब्ध ही नहीं होंगे तो लंबित मामलों का बोझ कैसे कम होगा। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से जजों के खाली पदों को जल्द भरने की मांग की।
जयहिंद ने कहा कि न्यायपालिका को कमजोर बताने या उस पर सवाल उठाने से पहले यह देखना जरूरी है कि न्याय व्यवस्था को पर्याप्त संसाधन और पर्याप्त संख्या में जज उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों से जुड़ा मुद्दा है। आम आदमी को समय पर न्याय मिलना चाहिए और इसके लिए न्याय व्यवस्था में जरूरी सुधार तथा जजों की नियुक्ति जल्द की जानी चाहिए।
नवीन जयहिंद ने कहा कि “तारीख पर तारीख” की व्यवस्था से सबसे ज्यादा परेशान आम आदमी है और अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।








