आठ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के 5,314 पद खाली होने का दावा

रेवाडी, 29 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब ने स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है।
विद्रोही ने कहा कि विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार कोविड काल में सरकारी अस्पतालों में लगाए गए 79 ऑक्सीजन प्लांटों में से 56 बंद हो चुके हैं और केवल 23 ही चालू हैं। उन्होंने सवाल किया कि करोड़ों रुपये खर्च करके लगाए गए जीवनरक्षक संयंत्रों का स्वास्थ्य विभाग रखरखाव तक क्यों नहीं कर सका?
उन्होंने कहा कि जो विभाग अस्पतालों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्लांटों को चालू नहीं रख सकता, उसकी कार्यप्रणाली और आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन उनका जमीनी वास्तविकता से कोई संबंध दिखाई नहीं देता।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग और सहायक कर्मचारियों की भारी कमी है। आवश्यक दवाएं और उपचार उपकरण उपलब्ध नहीं हैं तथा कई स्थानों पर मौजूद उपकरण भी खराब पड़े हैं। गंभीर रोगी के आते ही उसे पीजीआई रोहतक, चंडीगढ़ या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। इसके चलते सरकारी अस्पताल सामान्य उपचार और दवा की पर्ची लिखने तक सीमित होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणाओं को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करती है, लेकिन उनमें पर्याप्त भवन, दवाएं, उपकरण, उपचार सुविधाएं और चिकित्सा कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं हैं।
विद्रोही ने दावा किया कि जून 2026 तक प्रदेश के आठ संचालित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 2,572 पद, यानी लगभग 67 प्रतिशत, तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों के 2,742 पद, यानी लगभग 52 प्रतिशत, खाली थे। इस प्रकार दोनों श्रेणियों में कुल 5,314 पद रिक्त पड़े हैं।
उन्होंने सरकार से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांटों को तत्काल चालू करवाने, उनकी जवाबदेही तय करने तथा सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को समयबद्ध ढंग से भरने की मांग की।








