ओबीसी हितैषी होने का केवल दिखावा कर रही भाजपा: विद्रोही

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बोले—मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद प्रथम व द्वितीय श्रेणी की नौकरियों में नहीं मिला 27 प्रतिशत आरक्षण

रेवाड़ी, 23 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा पर पिछड़ा वर्ग के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओबीसी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सत्ता, प्रशासन और सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग को आबादी के अनुपात में भागीदारी दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनगणना-2027 में जातिगत गणना कराने की घोषणा तो कर रही है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और प्रश्नावली को लेकर अभी भी पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। उन्होंने मांग की कि जातिगत गणना वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से कराई जाए तथा पिछड़े वर्ग की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े भी जुटाए जाएं।

उन्होंने कहा कि जातिगत गणना का उद्देश्य केवल आंकड़े एकत्र करना नहीं, बल्कि ओबीसी समुदाय को सत्ता, प्रशासन, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में न्यायसंगत भागीदारी दिलाना होना चाहिए।

‘ओबीसी मुख्यमंत्री बनने से पिछड़ों को क्या मिला?’

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में भाजपा नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाकर स्वयं को पिछड़े वर्ग की हितैषी बताती है। उन्होंने सवाल किया कि ओबीसी समाज का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पिछले दो वर्षों में पिछड़े वर्ग को क्या वास्तविक लाभ मिला?

उन्होंने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों में मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 27 प्रतिशत आरक्षण देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया।

खाली पद छोड़कर आरक्षण कमजोर करने का आरोप

विद्रोही ने आरोप लगाया कि हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भी ओबीसी वर्ग को निर्धारित आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने का कारण बताकर आरक्षित पद खाली छोड़ दिए जाते हैं, जिससे आरक्षण का उद्देश्य कमजोर हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि खाली रहने वाले आरक्षित पदों को समाप्त करने के बजाय बैकलॉग में शामिल किया जाए और उन्हें भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए।

विद्रोही ने भाजपा के ओबीसी नेताओं पर भी समुदाय के हितों की प्रभावी पैरवी नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछड़े वर्ग के लोगों से अपने संवैधानिक अधिकारों और भावी पीढ़ियों के हितों के प्रति जागरूक होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की।

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Author: Bharat Sarathi

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