सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने खेद प्रकट किया

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• मीडिया में जो ‘रोल मॉडल’ शब्द चलाया जा रहा है वो मैंने नहीं बोला था, न ही वो तात्पर्य था – दीपेन्द्र हुड्डा

• मेरी मंशा किसी को भी ठेस पहुंचाने की नहीं थी, न मेरी कभी कोई ऐसी भावना थी – दीपेन्द्र हुड्डा

• सिख समाज के साथ पीढ़ियों से मेरा परिवार का रिश्ता रहा है सिख समाज के भाईयों को ठेस पहुँचाने की तो मैं सोच भी नहीं सकता – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 23 अगस्त। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने खेद प्रकट किया और कहा कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किया गया। प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में जिस ‘रोल मॉडल’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है वो मैंने नहीं बोला था, न ही वो तात्पर्य था। न ही सिख समाज को ठेस पहुंचाने का दूर-दूर तक मेरा कोई मकसद था। मेरी चार पीढ़ियों के सिख समाज से गहरे पारिवारिक संबंध रहे हैं। उस समाज को ठेस पहुंचाना तो दूर की बात है, मैं ऐसा करने की सोच भी नहीं सकता। फिर भी, अगर किसी की भावनाओं को ठेस लगी है तो वो एक भाई के नाते खेद प्रकट करते हैं। उनकी मंशा, उनका मकसद किसी का दिल दुखी करना कतई नहीं था। 1984 के दंगों में पीड़ित सिख भाईयों को न्याय मिले, मैं हमेशा इसका पक्षधर रहा हूँ।

उन्होंने कहा कि सिख समाज हमारे देश का गौरवशाली समाज है और उनको ऐसे समाज पर गर्व है जिन्होंने हम सबके लिए कुर्बानियां दीं। उसको हम कभी नहीं भूल सकते। आज भी देश की सीमाओं की रक्षा की बात हो, चाहे देश की आजादी की लड़ाई की बात रही हो, सिख कौम ने देश के लिए जो कुर्बानियां दी हैं, उस पर हमें गौरव है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सिख समाज एक देश भक्त समाज है। आजादी के पहले और आजादी के बाद भी सिख समाज ने देश की रक्षा के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियाँ दी हैं। 1908 में पंजाब में ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन के समय मेरे परदादा चौधरी मातूराम जी और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के चाचा सरदार अजीत सिंह जी को एक ही दिन काले पानी की सजा हुई थी। तब से लेकर हाल में जब किसान आंदोलन हुआ और पंजाब से हमारे किसान भाई आए, तो सबसे पहले मैं खुद उनके साथ पहुंचा। हर संघर्ष में हमेशा हम साथ रहे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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