हरियाणा कैबिनेट ने निजी कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के नियमों को दी मंजूरी
राज्य में चल रहे और नए खुलने वाले निजी कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के लिए अनुकूल माहौल करना है सुनिश्चित
सभी कोचिंग संस्थानों के लिए नामित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा अनिवार्य

चंडीगढ़, 13 अगस्त- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026’ के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य में निजी कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और कामकाज के लिए एक संरचित नियामक ढांचा प्रदान करना है।
ये नियम ‘हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2024’ के तहत बनाए गए हैं, जो उच्चतर अध्ययन, नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग देने वाले निजी कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और विनियमन का प्रावधान करेंगे।यह एक्ट भारत सरकार द्वारा जनवरी 2024 में जारी की गई गाइडलाइन के अनुरुप हैं।
स्वीकृत ढांचे के तहत प्रत्येक मौजूदा निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने की इच्छा रखने वाले किसी भी संस्थान को नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण के लिए 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से देय होगा। संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदनों की जांच करेगा और आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण पाए जाने पर, तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा।
नियमों में पंजीकरण के नवीनीकरण का भी प्रावधान है। निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और त्रुटियों को दूर करने (यदि कोई हो) के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
नियामक ढांचा कोचिंग संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर केंद्रित है। पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने और संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करने के अलावा, अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना अनिवार्य होगा।
आवेदन ढांचे के तहत कोचिंग संस्थानों को अपने पाठ्यक्रमों और पाठ्यक्रम-सामग्री और शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता (काउंसलिंग) और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा, और छात्रों की संख्या के अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी प्रदान करना आवश्यक है।
नियमों में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया गया है। निर्धारित जानकारी में फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, पुरुष और महिला छात्रों के लिए अलग शौचालय और अग्नि-सुरक्षा उपायों जैसी सुविधाओं के अलावा चिकित्सा सहायता या प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड), पार्किंग, पुस्तकालय या वाचनालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कैंटीन सुविधाएं शामिल हैं।
यह ढांचा भवन से संबंधित विवरण प्रस्तुत करने का भी प्रावधान करता है, जिसमें यह शामिल है कि भवन अपना है या लीज/किराए पर लिया गया है, अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता (स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी) प्रमाणन और क्या भवन विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) छात्रों के लिए बाधा मुक्त (बेरियर-फ्री) है। इसके अलावा कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त (एंटीसिडेंट्स) के सत्यापन के संबंध में भी जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
संस्थान को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों या अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए कोचिंग कक्षाएं उनके नियमित अध्ययन या कार्य समय के दौरान आयोजित न की जाएं।
इस नियामक ढांचे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निजी कोचिंग संस्थान पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-अनुकूल तरीके से काम करें, जबकि सरकार को उनके कामकाज की निगरानी करने और कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी तंत्र प्रदान किया जा सके।
विश्व बैंक वित्त पोषित 5,714 करोड़ रुपये के ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ से 45 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
कैबिनेट ने हरियाणा की बढ़ती जल चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी प्रोग्राम को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 13 अगस्त-हरियाणा के जल भविष्य को सुरक्षित करने और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की राज्य की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम (WSHP)’ को मंजूरी दी गई। इस प्रोग्राम की अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है। एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के तहत भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई दक्षता, जल उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में जल के सतत उपयोग जैसी चुनौतियों पर काम किया जाएगा। प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लगभग 45 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रोग्राम में 4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण तथा 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा।
यह प्रोग्राम 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। इसके तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (I&WRD), सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण (MICADA) तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न कार्य किए जाएंगे।
दीर्घकालिक जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन को मजबूत करेगा प्रोग्राम
वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम राज्य की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार होगा, पानी के संचरण में होने वाली हानि कम होगी तथा भूजल दोहन को कम करने में मदद मिलेगी। भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने और जलभराव वाले क्षेत्रों के सुधार पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और फसल विविधीकरण जैसे उपायों से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग कम करने में मदद मिलेगी। SCADA और RTDAS प्रणालियों की स्थापना से नहरी तंत्र और जल संसाधनों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे संचालन क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर होगी।
प्रोग्राम के माध्यम से संस्थागत क्षमता और जल प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा तथा किसानों की आय को जलवायु एवं अन्य चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बनाने पर जोर रहेगा।
निर्माण परियोजना के बजाय एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के रूप में तैयार किया गया WSHP
गौरतलब है कि हरियाणा के जल संसाधनों पर लगातार बढ़ता दबाव एक गंभीर चुनौती है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट और अत्यधिक दोहन, सिंचाई के लिए भूजल पर बढ़ती निर्भरता, पुराना नहर ढांचा और पानी के संचरण में होने वाली हानि, जलभराव एवं लवणीयता, भूजल पंपिंग के लिए बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता तथा सिंचाई की बढ़ती मांग के साथ फसल विविधीकरण की आवश्यकता प्रमुख चुनौतियां हैं।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम को केवल पारंपरिक निर्माण परियोजना के बजाय एक एकीकृत जल क्षेत्र प्रोग्राम के रूप में तैयार किया गया है।
सिंचाई ढांचे के आधुनिकीकरण और जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए बड़े निवेश
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (I&WRD) के तहत वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम में सिंचाई ढांचे के आधुनिकीकरण, जल उपलब्धता बढ़ाने और डिजिटल जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत लगभग 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा, जिससे लगभग 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (CCA) को लाभ मिलेगा।
इन कार्यों में नहरों का पुनर्वास, लाइनिंग तथा अन्य संबंधित सुधार कार्य शामिल होंगे, जिससे पानी के संचरण में होने वाली हानि कम होगी और सिंचाई सेवाओं की विश्वसनीयता एवं दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, मुख्य रूप से भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए लगभग 248 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।
प्रोग्राम के तहत चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की भी व्यवस्था की जाएगी, जिस पर लगभग 282.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।
डिजिटल जल प्रबंधन के तहत नहरों के स्वचालित और रियल टाइम संचालन के लिए 20 SCADA स्थान तथा पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की रियल टाइम निगरानी के लिए 400 RTDAS स्थान/माप बिंदु स्थापित किए जाएंगे। इससे आंकड़ों के आधार पर नहर संचालन, बेहतर जल लेखांकन तथा जल प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
MICADA और कृषि विभाग की योजनाओं से पानी की मांग घटेगी
सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण (MICADA) के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी।
वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तहत लगभग 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के माध्यम से सुधार किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 5लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडेड राइस को बढ़ावा दिया जाएगा तथा ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत लगभग 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण किया जाएगा।
इन सभी उपायों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पानी की मांग कम करना, सिंचाई दक्षता बढ़ाना तथा किसानों की आय को अधिक टिकाऊ और जलवायु चुनौतियों के प्रति मजबूत बनाना है।
कैबिनेट ने हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास और विनियमन नियम, 1976 में संशोधन को मंज़ूरी दी
चंडीगढ़, 13 अगस्त – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में विधानसभा की अधीनस्थ विधान समिति (2016-17) की 45वीं रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार ‘हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास और विनियमन नियम, 1976’ में संशोधनों को मंज़ूरी दी गई।
इन संशोधनों का उद्देश्य शहरी विकास नियामक ढांचे के तहत आवेदनों, जांच-पड़ताल, फैसलों की जानकारी देने और लाइसेंस के नवीनीकरण से जुड़े विभिन्न प्रावधानों को सरल और सुव्यवस्थित करना है।
ये संशोधन समिति की नौ सिफारिशों के आधार पर मंज़ूर किए गए हैं, जिन्हें नियमों में शामिल करने के लिए उपयुक्त पाया गया था। कुल 21 सिफारिशों में से बाकी 12 सिफारिशें पहले से ही ‘हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास और विनियमन अधिनियम, 1975’, मौजूदा नियमों या सरकारी नीतियों के दायरे में शामिल पाई गईं।
हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर फिजियोथेरेपी एक्ट, 2020 को निरस्त करने को मंत्रिमंडल की मंजूरी
चंडीगढ़, 13 अगस्त — मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नैशनल कमीशन फॉर अलाइड एण्ड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एक्ट, 2021 के प्रावधानों के मद्देनजर हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर फिजियोथेरेपी एक्ट, 2020 को निरस्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
फिजियोथेरेपी व्यवसाय को एन. सी. ए. एच. पी. ऐक्ट, 2021 की अनुसूची में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। वर्तमान में हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद द्वारा किए जा रहे नियामक कार्यों को राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषद के वैधानिक ढांचे के अनुरूप लाना तथा उसमें समाहित करना आवश्यक है।
इसी के अनुरूप, हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर फिजियोथेरेपी ऐक्ट, 2020 को निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही उचित एवं संक्रमणकालीन प्रावधान किए जाएंगे, ताकि हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद के मौजूदा पंजीकरण, प्रमाण-पत्र, अभिलेख, परिसंपत्तियां, देनदारियां, लंबित कार्यवाहियां तथा अन्य कार्य किसी भी प्रकार से प्रभावित न हों।
इस निर्णय से फिजियोथेरेपी व्यवसाय के नियमन को एन. सी. ए. एच. पी. ऐक्ट, 2021 के अनुरूप लाने में मदद मिलेगी तथा संबंधित पेशेवरों के पंजीकरण और नियामक व्यवस्था में एकरूपता सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा, ‘नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स एक्ट, 2021’ (सेंट्रल एक्ट) की धारा 22 के तहत, इस विषय को रेगुलेट करने के लिए हरियाणा राज्य एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल (HSAHC) का गठन पहले ही किया जा चुका है और 27 जुलाई, 2026 को एड-हॉक आधार पर इसकी अधिसूचना जारी की गई है।
हरियाणा कैबिनेट का महत्वपूर्ण फैसला
स्टार्टअप के लिए अधिक प्रोत्साहन, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को विशेष सहायता और हरियाणा के स्टार्टअप प्रणाली को मजबूत करने के लिए नई पहल
चंडीगढ़, 13 अगस्त- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूदा हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 में व्यापक पूरक प्रावधान को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य में स्टार्टअप प्रणाली को और मजबूत करना, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना तथा उभरते उद्यमियों को बेहतर वित्तीय एवं संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।
यह पूरक प्रावधान संकल्प पत्र के तहत की गई वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण की विभिन्न घोषणाओं, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के निर्देशों तथा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और स्टार्टअप एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान की गई घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नीति के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्टार्टअप को उनके विकास के विभिन्न चरणों में अधिक प्रभावी सहायता प्रदान करना है।
पूरक प्रावधानों के तहत महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष के लिए लीज के किराए में 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये तक होगी। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि के लिए शुद्ध एसजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी, जो स्थायी पूंजी निवेश (एफसीआई) के 100 प्रतिशत की सीमा तक होगी। सामान्य स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी।
मंजूर किए गए पूरक प्रावधानों के तहत स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग/टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। इसके अलावा, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण अनुकूल ग्रामीण उत्पाद, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं कल्याण उत्पाद तथा स्वदेशी खाद्य उत्पाद जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के विषयगत सूक्ष्म अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्टार्टअप को बड़े बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए घरेलू आयोजनों और प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहायता दी जाएगी। सामान्य स्टार्टअप को भागीदारी लागत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक, जबकि महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को प्रति वर्ष 7 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी।
सरकार ने स्टार्टअप को गुणवत्ता मानकों को अपनाने और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रावधान भी किए हैं। स्टार्टअप को गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने पर होने वाली लागत की 50 प्रतिशत की एकमुश्त प्रतिपूर्ति मिलेगी, जो अधिकतम 25 लाख रुपये तक होगी।
स्कूल स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के बीच 10,000 ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट वितरित की जाएंगी। हरियाणा में एक विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर ‘एच-हब’ भी स्थापित किया जाएगा। इसे राज्य के प्रमुख स्टार्टअप, कॉरपोरेट और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। यह इन्क्यूबेटर स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाएं और उनके उद्यमों को विस्तार देने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
सरकारी खरीद में स्टार्टअप के लिए अधिक अवसर पैदा करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार अपनी वार्षिक विभागीय खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा आधारित पात्र स्टार्टअप के लिए आरक्षित करेगी। इसके अलावा, हरियाणा में कार्यरत कॉरपोरेट कंपनियों को राज्य आधारित स्टार्टअप के साथ पायलट परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दी जाएगी, बशर्ते संबंधित कॉरपोरेट कंपनियां ऐसी पायलट परियोजनाओं को स्टार्टअप के साथ अनुबंध में परिवर्तित करें।
स्टार्टअप में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार सीड फंड मैचिंग प्रोविजन के तहत निजी या एंजल निवेशक से जुटाए गए प्रत्येक 25 लाख रुपये के निवेश पर 25 लाख रुपये तक का सह-निवेश या मैचिंग ग्रांट उपलब्ध कराएगी।
युवा प्रतिभाओं और स्टार्टअप के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्टार्टअप के साथ अप्रेंटिसशिप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस प्रति माह 7,500 रुपये तक के वजीफे की 50 प्रतिशत लागत की प्रतिपूर्ति मिलेगी। यह सुविधा प्रति इकाई प्रति वर्ष अधिकतम 50 अप्रेंटिस तक सीमित होगी।
क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज की बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए क्लाउड कंप्यूटिंग/स्टोरेज पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब हरियाणा आधारित स्टार्टअप को भारत में स्थित किसी भी डेटा सेंटर में किए गए ऐसे खर्च की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी। यह सहायता पांच वर्ष की अवधि तक प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये तक होगी।
मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान के अनुसार, चंडीगढ़ में पंजीकृत कार्यालय वाले स्टार्टअप को भी श्रेणी-2 स्टार्टअप माना जाएगा। इससे वे हरियाणा स्टार्टअप नीति के तहत उपलब्ध लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।
लाइसेंस प्राप्त आवासीय कॉलोनियों में नर्सिंग होम स्थापित करने की नीति में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी
चंडीगढ़, 13 अगस्त — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लाइसेंस प्राप्त आवासीय कॉलोनियों में नर्सिंग होम स्थापित करने की नीति में संशोधन को मंजूरी प्रदान की है।
संशोधन के अनुसार अब योग्य डॉक्टरों को अपने स्वामित्व वाले आवासीय प्लॉट के साथ-साथ लीज पर लिए गए आवासीय प्लॉट पर भी नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए निर्धारित कन्वर्जन शुल्क का भुगतान करना होगा।
संशोधन के तहत एलोपैथिक/आयुष पद्धति के डॉक्टरों के आवासीय प्लॉट पर नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी, जिसमें मरीजों को भर्ती करने और इनडोर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉक्टरों के पास मेडिकल काउंसिल/आयुष काउंसिल का पंजीकरण नंबर होना आवश्यक होगा। डॉक्टर का वर्तमान में प्रैक्टिस करना तथा स्थानीय शाखा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के साथ पंजीकृत होना भी आवश्यक होगा। इस संबंध में आवेदन के साथ शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होगा।
यदि नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति लीज पर लिए गए प्लॉट पर दी जाती है, तो यह अनुमति लीज की अवधि के साथ सह-समाप्त (co-terminus) होगी।
इससे पहले लागू प्रावधान के अनुसार नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति केवल योग्य डॉक्टरों के स्वामित्व वाले आवासीय प्लॉट पर दी जाती थी। अब संशोधन के बाद योग्य डॉक्टरों द्वारा लीज पर लिए गए आवासीय प्लॉट भी इसके दायरे में शामिल होंगे।
कैबिनेट ने गुरुग्राम में मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी स्थापित करने के बिल को मंज़ूरी दी
इस कदम का मकसद उच्च शिक्षा के मौकों को बढ़ाना और NEP-2020 के तहत 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देना है
चंडीगढ़, 13 अगस्त -हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में “हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006” में संशोधन करके गुरुग्राम में मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए ‘हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ (संशोधन) बिल, 2026’ लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है।
प्रस्तावित यूनिवर्सिटी की स्थापना शांति फाउंडेशन ट्रस्ट, गुरुग्राम द्वारा की जाएगी, जो शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाला एक चैरिटेबल, गैर-राजनीतिक, गैर-लाभकारी और धर्म-निरपेक्ष ट्रस्ट है। इस प्रस्ताव का मकसद राज्य के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के मौकों का विस्तार करना और हरियाणा में उच्च शिक्षा की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को मज़बूत करना है।
यूनिवर्सिटी को लगभग 5.14 एकड़ की जुड़ी हुई ज़मीन पर स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस जगह पर पहले से ही लगभग 1,07,358 वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र वाली एक इमारत मौजूद है, जिसमें लगभग 96,600 वर्ग फुट का शिक्षण क्षेत्र, 5,400 वर्ग फुट का प्रशासनिक क्षेत्र, 5,000 वर्ग फुट का सुविधाओं वाला क्षेत्र और 358 वर्ग फुट का आवाजाही (सर्कुलेशन) क्षेत्र शामिल है। प्रायोजक ट्रस्ट के पास यह प्रॉपर्टी 30 साल की लीज़ पर है।
इस प्रस्ताव की जांच हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 के तहत गठित संबंधित कमेटियों ने की है। एकेडमिक कमेटी और फाइनेंस कमेटी ने प्रस्ताव की जांच की, जबकि हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने तय शर्तों के अधीन ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ जारी करने की सिफारिश की। इसके बाद प्रायोजक संस्था ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट (कम्प्लायंस रिपोर्ट) सौंपी, जिसकी पुष्टि इस काम के लिए गठित कमेटी ने की।
यूनिवर्सिटी की स्थापना राज्य के उच्च शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और छात्रों को बेहतर मौके देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के उस मकसद का भी समर्थन करता है, जिसके तहत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।








