मानसून की असमान बारिश के बीच जल प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन नीति जरूरी, सिरसा ब्रांच नहर का भी हो पुनरुद्धार
लोकसभा और मुख्यमंत्री के समक्ष पहले भी उठा चुकी हैं मुद्दा, पश्चिमी हरियाणा के किसानों को मिल सकती है बड़ी राहत
चंडीगढ़, 2 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में इस वर्ष मानसून की बारिश का असमान वितरण एक बार फिर प्रदेश में बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित कर रहा है। प्रदेश के अनेक हिस्सों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के कारण जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त बरसाती पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन योजना पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि उन्होंने पहले भी लोकसभा में तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष यमुना नदी के अतिरिक्त बरसाती पानी को घग्गर नदी प्रणाली से जोड़ने और पश्चिमी हरियाणा तक पहुंचाने की संभावनाओं पर ठोस पहल करने की मांग उठाई थी। अब मानसून के मौजूदा हालात को देखते हुए वे एक बार फिर केंद्र और हरियाणा सरकार से मांग करती हैं कि विशेषज्ञों से इसकी तकनीकी और पर्यावरणीय व्यवहार्यता का अध्ययन करवाकर इस दिशा में आगे बढ़ा जाए।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि मानसून के दौरान कई बार यमुना में अतिरिक्त पानी आने से दिल्ली और हरियाणा के यमुना से सटे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है, जबकि दूसरी ओर सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई तथा पेयजल के लिए पर्याप्त पानी की समस्या बनी रहती है। यदि अतिरिक्त बरसाती पानी को वैज्ञानिक तरीके से नहरों, जलाशयों और घग्गर प्रणाली की ओर मोड़ने की व्यवहार्य व्यवस्था विकसित की जाती है तो इससे एक तरफ बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है और दूसरी तरफ पानी की कमी वाले क्षेत्रों को राहत मिल सकती है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सिरसा ब्रांच नहर भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्ष 1896 में निर्मित यह नहर पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली से जुड़ी रही है और करनाल क्षेत्र से निकलकर कैथल, जींद, फतेहाबाद तथा सिरसा की ओर पानी पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था रही है। लंबे समय से पर्याप्त रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी उपयोगिता प्रभावित हुई है। सरकार को इसके पूरे नेटवर्क का तकनीकी सर्वे करवाकर पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण की संभावनाओं पर काम करना चाहिए।
सांसद ने कहा कि हरियाणा के किसानों के लिए पानी केवल सिंचाई का विषय नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद जैसे जिलों में भूजल का अत्यधिक दोहन भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। सतही जल की उपलब्धता बढ़ाकर भूजल पर निर्भरता कम करना समय की आवश्यकता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि पानी जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार को जल विशेषज्ञों, सिंचाई विभाग, पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित क्षेत्रों के किसान प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक व्यापक योजना तैयार करनी चाहिए। इसमें यमुना के मानसूनी अतिरिक्त पानी के बेहतर उपयोग, सिरसा ब्रांच नहर के पुनरुद्धार, घग्गर प्रणाली की क्षमता तथा पश्चिमी हरियाणा में जल भंडारण के विकल्पों का समग्र अध्ययन किया जाए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि जहां अतिरिक्त पानी समस्या बन रहा है, वहां से उस पानी को वैज्ञानिक और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित तरीके से उन क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशना जरूरी है जहां किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार को इस दिशा में केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि समयबद्ध तकनीकी अध्ययन और ठोस कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया कि किसानों और आने वाली पीढ़ियों के हित को देखते हुए इस प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जाए। यदि यमुना के अतिरिक्त मानसूनी पानी के सदुपयोग और पश्चिमी हरियाणा तक उसकी उपलब्धता की व्यवहार्य व्यवस्था बनती है तो यह सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद सहित प्रदेश के बड़े हिस्से के लिए दीर्घकालीन जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।








