• *2015 में 102.5 वर्ग किमी था बिल्ट-अप एरिया, 2025 में बढ़कर 168.2 वर्ग किमी हुआ*
• *सड़क, ड्रेनेज, पेयजल, सीवरेज और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की भविष्य की योजना बनाने में मिलेगी मदद*
*गुरुग्राम, 2 अगस्त*। गुरुग्राम का विकसित शहरी क्षेत्र (बिल्ट-अप एरिया) पिछले दस वर्षों में करीब 64 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2015 में जहां शहर का बिल्ट-अप एरिया 102.50 वर्ग किलोमीटर था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 168.20 वर्ग किलोमीटर हो गया है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) प्रभाग द्वारा कराए गए एक विस्तृत जियोस्पेशियल अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। अध्ययन के अनुसार वर्ष 2030 तक शहर का विस्तार प्रमुख विकास कॉरिडोर के साथ और तेज़ी से जारी रहने की संभावना है, जिसके मद्देनज़र एकीकृत आधारभूत ढांचे की दीर्घकालिक योजना आवश्यक होगी।
यह अध्ययन शहर के बदलते विकास स्वरूप के अनुरूप सड़कों, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम तथा अन्य शहरी आधारभूत सुविधाओं की वैज्ञानिक एवं दीर्घकालिक योजना तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी. सी. मीणा ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों के लिए डेटा आधारित योजना बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीआईएस अध्ययन से गुरुग्राम के विकास के पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने और भविष्य की आधारभूत संरचना संबंधी आवश्यकताओं का समय रहते आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे विकास परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और शहरीकरण की गति के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विस्तार करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएमडीए का उद्देश्य गुरुग्राम को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक नागरिक सुविधाओं और टिकाऊ विकास वाला भविष्य के लिए तैयार शहर बनाना है।
जीएमडीए के जीआईएस अनुभाग के हेड वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुल्तान सिंह ने बताया कि अध्ययन के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस), सांख्यिकीय विश्लेषण तथा एडवांस्ड मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग किया गया। अध्ययन में शहरी विस्तार की मैपिंग 92 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ की गई, जिससे शहर में भूमि उपयोग में हुए बदलावों का विश्वसनीय आकलन संभव हो सका।
अध्ययन के अनुसार गुरुग्राम का अधिकांश शहरी विस्तार द्वारका एक्सप्रेसवे, सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर ), एनएच-48, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सोहना रोड, न्यू गुरुग्राम, साइबर सिटी-उद्योग विहार और आईएमटी मानेसर जैसे प्रमुख परिवहन एवं विकास कॉरिडोर के आसपास केंद्रित रहा है। रिपोर्ट में बेहतर कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और नियोजित शहरी विकास को इस विस्तार के प्रमुख कारण बताया गया है।
श्री पी. सी. मीणा ने कहा कि जियोस्पेशियल तकनीक अब जीएमडीए के लिए शहरी नियोजन का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुकी है। इसके माध्यम से भूमि उपयोग और आधारभूत ढांचे की जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है। अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य की परियोजनाओं को प्राथमिकता देने, दीर्घकालिक शहरी नियोजन को मजबूत करने तथा शहर के अनुमानित विकास के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विस्तार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अध्ययन में वर्ष 2030 तक इन विकास कॉरिडोर के साथ शहरी विस्तार तेजी से जारी रहने का अनुमान जताया गया है। इसके मद्देनज़र एकीकृत भूमि उपयोग योजना, टिकाऊ आधारभूत संरचना, बेहतर परिवहन नेटवर्क, जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन तथा पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक क्षेत्रों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जीएमडीए का मानना है कि यह अध्ययन गुरुग्राम के अगले चरण के शहरी विकास की योजना तैयार करने में एक महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज़ साबित होगा।








