जनता शिक्षा, रोजगार और महंगाई पर जवाब चाहती है, भाजपा अपमानजनक बयानबाजी से मुद्दों को भटका रही है
गुरुग्राम | 30 जुलाई 2026 – हरियाणा कांग्रेस की जिला सचिव (ग्रामीण) एवं सामाजिक कार्यकर्ता सतवंती नेहरा ने भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा महिलाओं और माताओं को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि को महिलाओं, उनकी माताओं और पूरे समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
सतवंती नेहरा ने कहा कि यदि किसी आंदोलन, प्रदर्शन या व्यक्ति के विचारों से असहमति है तो उसका जवाब तथ्यों, तर्कों और संवैधानिक मर्यादा के भीतर दिया जाना चाहिए। पूरे समाज की महिलाओं और उनकी माताओं को कटघरे में खड़ा करना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का भी अपमान है।
उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा महिलाओं के सम्मान की बात करती है, लेकिन जब उसकी अपनी सांसद सार्वजनिक मंच से ऐसी भाषा का प्रयोग करती हैं, जिससे देशभर की महिलाओं की भावनाएं आहत होने का आरोप लगता है, तब पार्टी नेतृत्व और केंद्र सरकार की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
सतवंती नेहरा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि यदि किसी अन्य दल का नेता ऐसा बयान देता तो क्या भाजपा इतनी ही खामोश रहती? महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते। महिला सम्मान राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की संवेदनशीलता और सामाजिक संस्कारों का प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है तो कानून उसके विरुद्ध कार्रवाई करे, लेकिन कुछ व्यक्तियों की गलती के आधार पर पूरे समुदाय, सभी महिलाओं या उनकी माताओं पर टिप्पणी करना न तो न्यायसंगत है और न ही संविधान की भावना के अनुरूप।
सतवंती नेहरा ने कहा कि आज देश का युवा रोजगार मांग रहा है, छात्र पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, किसान अपनी फसलों का उचित मूल्य चाहते हैं, महिलाएं सुरक्षा और सम्मान की अपेक्षा कर रही हैं तथा आम जनता महंगाई से त्रस्त है। ऐसे समय में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा समाज को बांटने वाली और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संवाद, संयम और जवाबदेही से मजबूत होता है, न कि कटु भाषा और व्यक्तिगत हमलों से। संसद और सार्वजनिक जीवन में बैठे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने शब्दों से समाज को जोड़ने का काम करें, न कि सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दें।
सतवंती नेहरा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। ऐसे में किसी भी महिला, मां या बेटी की गरिमा पर चोट पहुंचाने वाले बयान को किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। महिलाओं के सम्मान के प्रश्न पर सभी दलों को एकजुट होकर स्पष्ट संदेश देना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा संविधान, सामाजिक सौहार्द, महिलाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रही है और आगे भी हर उस विचार का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी जो समाज में नफरत, विभाजन और महिलाओं के प्रति असम्मान को बढ़ावा देता हो।









