ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से पूछा—100 दिन की गारंटी में कितने दिन मिला काम, कितना दिया बेरोजगारी भत्ता?
रेवाड़ी, 30 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे पिछले पांच वर्षों में मनरेगा के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में ग्रामीण मजदूरों को औसतन कितने दिन रोजगार मिला और 100 दिन की कानूनी गारंटी पूरी न होने पर कितने मजदूरों को कितना बेरोजगारी भत्ता दिया गया, इसका पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करें।
विद्रोही ने कहा कि यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई से लागू नई वीबीजी राम जी योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को साल में 125 दिन रोजगार देने और काम न मिलने पर भत्ता देने के दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार को रेवाड़ी के उपायुक्त ने भी अधिकारियों की बैठक के बाद इसी प्रकार का दावा किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे दावों की विश्वसनीयता तभी साबित होगी जब पहले यह बताया जाए कि अप्रैल 2020 से 30 जून 2026 तक रेवाड़ी सहित पूरे हरियाणा में मनरेगा के तहत प्रत्येक वर्ष कितने मजदूरों को औसतन कितने दिन काम मिला तथा 100 दिन का रोजगार नहीं मिलने पर कितने पात्र मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया।
विद्रोही का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में हरियाणा में मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को औसतन केवल 15 से 20 दिन का ही रोजगार मिला, जबकि शेष 80 से 85 दिनों के लिए न तो काम उपलब्ध कराया गया और न ही कानून के अनुसार कोई मुआवजा या बेरोजगारी भत्ता दिया गया।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में रोजगार का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि नई वीबीजी राम जी योजना में केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत खर्च उठाना होगा। ऐसे में यदि 100 दिन की गारंटी वाली योजना का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका तो 125 दिन रोजगार देने के दावे पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे।
विद्रोही ने कहा कि यदि सरकार अपने दावों को लेकर गंभीर और पारदर्शी है तो उसे मनरेगा के वास्तविक रोजगार, भुगतान और बेरोजगारी भत्ते से संबंधित जिलेवार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि नई योजना की व्यवहारिकता का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।









