धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के लंबे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया, एनटीए भंग करने और नई शिक्षा नीति-2020 वापस लेने की मांग
गुरुग्राम, 25 जुलाई। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने पेपर लीक, शिक्षा के व्यापारीकरण और छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर में लंबे समय तक आंदोलन करने वाले छात्र-युवाओं को बधाई देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को उनके लोकतांत्रिक और निरंतर संघर्ष की महत्वपूर्ण जीत बताया है।
समिति ने जारी बयान में कहा कि लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया। इससे पैदा हुई निराशा और मानसिक दबाव के कारण कई छात्र-छात्राओं ने अपनी जान तक गंवाई। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने लंबे समय तक छात्रों की मांगों की अनदेखी की और आंदोलन को दबाने के लिए लाठीचार्ज तथा अन्य दमनात्मक कदम उठाए। समिति का कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद छात्रों और युवाओं ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।
जनवादी महिला समिति ने कहा कि देशभर में चले इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। संगठन का आरोप है कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान हुए पुलिसिया दमन में अनेक छात्राओं को हिंसा और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। समिति ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
समिति का कहना है कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का समाधान नहीं है। संगठन ने बार-बार होने वाले पेपर लीक के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे भंग करने तथा परीक्षा प्रणाली का विकेंद्रीकरण करने की मांग की, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने की भी मांग दोहराई गई।
समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि छात्रों की इस ऐतिहासिक पहल से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी लोकतांत्रिक संघर्ष को नई ऊर्जा मिलेगी।








