शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की मांग, सरकार पर पेपर लीक माफिया को संरक्षण देने का आरोप
रेवाडी, 25 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता के अहंकार में नीट पेपर लीक और देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद पर बनाए रखकर प्रदर्शनकारी छात्रों, युवाओं, विपक्ष और देश की जनता की भावनाओं की अनदेखी कर रहे हैं।
विद्रोही ने कहा कि जब विपक्ष के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र और युवा शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तब भी उन्हें पद पर बनाए रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना था कि लोकतंत्र लोकलाज और जवाबदेही से चलता है, न कि सत्ता के अहंकार से।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से लगातार हर वर्ष नीट परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार अब तक किसी भी आरोपी को सजा नहीं दिला सकी। विद्रोही ने दावा किया कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में बिहार के कथित मुख्य साजिशकर्ता संजय मुखिया को पहले समय पर आरोपपत्र दाखिल न किए जाने के कारण जमानत मिली और बाद में सीबीआई ने जांच के उपरांत उसे क्लीन चिट देकर अदालत से बरी करा दिया। उनके अनुसार इससे सरकार के पेपर लीक मामलों में कठोर कार्रवाई के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का रवैया यह संकेत देता है कि वह अप्रत्यक्ष रूप से पेपर लीक माफिया को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि संसद मार्च के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई तथा कथित बल प्रयोग सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ पुलिस का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। विद्रोही ने कहा कि संसद का गतिरोध समाप्त करने के लिए सरकार को शिक्षा मंत्री के खिलाफ उठ रही मांगों पर विचार करना चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।









