भाजपा की गुटबाजी में फंसा अहीरवाल का विकास, किसान भी बन रहे राजनीतिक संघर्ष के शिकार : विद्रोही

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

11 वर्षों की वर्चस्व की राजनीति ने विकास परियोजनाओं को रोका, सरकार को मिला भेदभाव का अवसर

रेवाड़ी, 10 जुलाई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि अहीरवाल क्षेत्र में भाजपा की गुटबाजी और वर्चस्व की राजनीति ने न केवल क्षेत्र के विकास को प्रभावित किया है, बल्कि राज्य सरकार को भी अहीरवाल के साथ विकास कार्यों और सामाजिक सरोकारों में भेदभाव करने का अवसर प्रदान किया है।

विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल में भाजपा नेताओं के बीच चौधर और वर्चस्व की लड़ाई पिछले 11 वर्षों से क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में क्षेत्र के साथ भेदभावपूर्ण नीति अपनाई गई और अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यकाल में भी वही स्थिति दिखाई दे रही है। यही कारण है कि अहीरवाल क्षेत्र की अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं।

बावल और धारूहेड़ा की घटनाओं ने उजागर की भाजपा की आंतरिक खींचतान

विद्रोही ने कहा कि बावल में आयोजित केंद्रीय कृषि मंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री के “खेती बचाओ” कार्यक्रम का स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह, रेवाड़ी जिले के तीनों भाजपा विधायक तथा पार्टी के अनेक पदाधिकारियों ने प्रोटोकॉल के नाम पर बहिष्कार किया। इसी प्रकार धारूहेड़ा नगरपालिका चेयरमैन के शपथ ग्रहण समारोह का भी एक भाजपा विधायक द्वारा प्रोटोकॉल का हवाला देकर बहिष्कार किया गया।

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा की आंतरिक गुटबाजी अब सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी है और इसका सीधा असर क्षेत्र के विकास पर पड़ रहा है।

अब किसानों के कंधों पर रखी जा रही है राजनीतिक बंदूक

विद्रोही ने आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल की राजनीति के बाद अब भाजपा नेता किसानों को आगे करके एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और विकास विरोधी होने के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की गुटबाजी अब किसानों के मुद्दों को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगी है।

दस साल बाद भी अधूरा है नारनौल का मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब

उन्होंने कहा कि पिछले लगभग दस वर्षों से प्रस्तावित नारनौल का मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। एक ओर परियोजना पूरी नहीं हो सकी, वहीं दूसरी ओर इसी परियोजना के लिए किसानों से अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर भाजपा के भीतर ही दो गुट आमने-सामने खड़े हो गए हैं।

विद्रोही ने कहा कि पहले किसानों के एक समूह ने आरोप लगाया था कि उनकी भूमि कम कीमत पर अधिग्रहित की गई और उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। यह मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा।

अब दूसरा गुट मुआवजे को उचित ठहराने में जुटा

उन्होंने कहा कि अब भाजपा के दूसरे गुट द्वारा किसानों को आगे कर यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि भूमि स्वेच्छा से दी गई थी और किसानों को उचित मुआवजा मिला था। इसी उद्देश्य से बशीरपुर, तालोट, घाटासेरा और छिल्लरो गांवों के किसानों द्वारा गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कम मुआवजे और भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया गया तथा दूसरे पक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया।

भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत मुआवजा क्यों नहीं?

वेदप्रकाश विद्रोही ने सवाल उठाया कि यदि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 लागू है, तो किसानों को उसके प्रावधानों के अनुसार मुआवजा क्यों नहीं मिला? विकास के नाम पर किसानों की जमीन कम कीमत पर अधिग्रहित करने और बाद में उसी व्यवस्था को किसानों से सही ठहरवाने का प्रयास बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि जो किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि सरकार को देना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने का अधिकार है, लेकिन जो किसान कानून के तहत उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं, उनके संवैधानिक अधिकारों को राजनीतिक गुटबाजी की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।

किसान हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा की गुटबाजी के कारण न केवल मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब जैसी महत्वपूर्ण परियोजना वर्षों से अटकी हुई है, बल्कि किसानों के हित भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इसे किसान हितों के खिलाफ और किसान लूट को बढ़ावा देने वाला कृत्य बताते हुए सरकार से मांग की कि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत सभी प्रभावित किसानों को न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए तथा अहीरवाल क्षेत्र की लंबित विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!