करोड़ों रुपये के दावों पर पानी फिरा, सड़कों के धंसने और घंटों के जाम ने उजागर की सरकार और प्रशासन की नाकामी
गुरुग्राम/बादशाहपुर। मंगलवार को हुई बारिश ने एक बार फिर भाजपा सरकार के विकास और स्मार्ट सिटी के दावों की वास्तविकता जनता के सामने ला दी। देश की तथाकथित मिलेनियम सिटी गुरुग्राम कुछ घंटों की बारिश में ही जलभराव, धंसी सड़कों और ट्रैफिक जाम के दलदल में फंस गई। इस स्थिति को लेकर जिला गुरुग्राम कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष वर्धन यादव ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जिस विकास मॉडल का ढोल पीटा जा रहा था, वह पहली ही बारिश में बह गया।”
वर्धन यादव ने कहा कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों, ड्रेनेज सुधार और जलनिकासी परियोजनाओं के दावे करने वाली सरकार यह बताए कि आखिर वह पैसा गया कहां, जब एक बारिश भी शहर नहीं झेल पाया। गुरुग्राम जैसे देश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले शहर को बदहाल सड़कों, जलभराव और घंटों लंबे जाम की सौगात देना सरकार की प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि सिविल लाइन रोड पर सड़क धंसना और दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा बैठ जाना केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, लापरवाही और घटिया निर्माण कार्यों की कहानी बयां करता है। यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें पहली बारिश में जवाब दे दें, तो यह स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ हुआ है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने के नाम पर बैठकों, घोषणाओं और प्रेस विज्ञप्तियों का दौर चलता है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस रहती है। बारिश आते ही सरकारी दावे कागजों से निकलकर सड़कों पर तैरते नजर आने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की जनता भारी टैक्स देती है, लेकिन बदले में उसे टूटी सड़कें, जलमग्न चौराहे और घंटों की यातायात अव्यवस्था मिलती है। कॉर्पोरेट कर्मचारियों से लेकर स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों तक सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हजारों लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे और कई लोगों को घर तथा कार्यालय पहुंचने में कई गुना अधिक समय लगा।
वर्धन यादव ने मांग की कि जलभराव, सड़क धंसने और निर्माण कार्यों में संभावित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर केवल विज्ञापन, दावे और सरकारी प्रस्तुतियां दिखाई जा रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं पहली बारिश में ही घुटने टेक देती हैं। जनता अब नारों और प्रचार से नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिणाम चाहती है।








