भाजपा पर ‘जुमलों की राजनीति’ का आरोप, बोले—हरियाणा की जनता नहीं, कांग्रेस की गुटबाजी ने दिलाई सत्ता
रेवाडी, 7 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के इस दावे कि भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2024 विधानसभा चुनाव में किए गए 217 चुनावी वादों में से 66 वादे पूरे कर दिए हैं, पर स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा ने वास्तव में 66 वादे पूरे किए हैं तो उनकी पूरी सूची, क्रियान्वयन की तिथि और संबंधित आदेश सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जनता स्वयं सरकार के दावों की सच्चाई परख सके।
विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल आंकड़ों का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर वे 66 वादे कौन-से हैं, कब पूरे हुए और उनका लाभ प्रदेश के लोगों तक किस रूप में पहुंचा? उनका कहना था कि भाजपा को केवल दावे करने के बजाय प्रमाणों के साथ जनता के सामने आना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से भाजपा चुनावी वादों को लेकर इसी तरह के दावे और जुमले पेश करती रही है। उनके अनुसार, 2014 और 2019 के चुनावों के बाद भी भाजपा ने अपने अधिकांश वादे पूरे करने का दावा किया था, जबकि प्रदेश की जनता वास्तविक स्थिति से भली-भांति परिचित है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी थी, लेकिन कांग्रेस की गुटबाजी, आपसी फूट और एक-दूसरे को हराने की राजनीति के कारण भाजपा को अप्रत्याशित लाभ मिल गया। उन्होंने दावा किया कि नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि कांग्रेस की कमजोरियों के कारण मिली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की अंदरूनी कलह ने भाजपा को राजनीतिक जीवनदान दिया और अब उसी के बल पर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है। विद्रोही ने कहा कि भाजपा नेतृत्व सत्ता के अहंकार में यह तक कहने लगा है कि वह चौथी बार भी सरकार बनाएगा, जबकि राज्य में भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर जनता लगातार परेशान है।
विद्रोही ने मुख्यमंत्री से मांग की कि यदि सरकार अपने दावे को लेकर गंभीर है तो 66 पूरे किए गए चुनावी वादों का विस्तृत सार्वजनिक ब्यौरा जारी करे। इसमें प्रत्येक वादे की स्थिति, उसे लागू करने की तिथि, जारी किए गए सरकारी आदेश तथा उससे लाभान्वित लोगों का विवरण भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ही सरकार के दावों की विश्वसनीयता साबित कर सकती है।









