हरियाणा कांग्रेस में बार-बार प्रभारी बदलने की नीति छोड़ें, 2029 तक स्थायी प्रभारी नियुक्त करें: विद्रोही

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ग्रामीण भारत के अध्यक्ष बोले—हरियाणा में कम से कम 15 दिन रहकर जमीनी स्तर पर संगठन संभाले प्रभारी, तभी गुटबाजी पर लगेगी लगाम

रेवाडी, 5 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी के रूप में संजय दत्त की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कांग्रेस हाईकमान को संगठनात्मक सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बार-बार प्रभारी बदलने की नीति से संगठन को कोई लाभ नहीं मिला है। कांग्रेस नेतृत्व को अब प्रयोगों से बचते हुए कम से कम वर्ष 2029 के लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनाव तक एक स्थायी प्रभारी महासचिव की नियुक्ति करनी चाहिए।

विद्रोही ने कहा कि पिछले कई वर्षों से हरियाणा कांग्रेस में प्रभारी लगातार बदले जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि कोई भी प्रभारी राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक ढांचे और स्थानीय चुनौतियों को पूरी तरह समझ नहीं पाया। जब तक कोई प्रभारी हरियाणा की जमीनी राजनीति को समझने लगता है, उससे पहले ही उसे बदल दिया जाता है। ऐसे में संगठन को अपेक्षित दिशा और स्थिरता नहीं मिल पाती।

उन्होंने कहा कि हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझ रही है। प्रदेश के वरिष्ठ नेता किसी बड़े कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन करना तो दूर, प्रदेश स्तरीय बैठकों में भी एकजुट होकर शामिल नहीं होते। उनका कहना था कि हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केवल तब एक मंच पर दिखाई देते हैं, जब राहुल गांधी का राज्य दौरा होता है। इसके अलावा सार्वजनिक कार्यक्रमों में सभी नेताओं का एक साथ उपस्थित होना पिछले दस वर्षों से लगभग असंभव बना हुआ है।

विद्रोही ने सुझाव दिया कि कांग्रेस हाईकमान हरियाणा प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दे कि वह वर्ष 2029 तक संगठन की जिम्मेदारी संभाले और दिल्ली से पार्टी संचालन करने के बजाय प्रत्येक माह कम से कम 15 दिन हरियाणा में रहकर संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन करे। उन्होंने कहा कि जो प्रभारी राज्य में समय नहीं दे सकता, उसके प्रभारी बनने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश प्रभारी को केवल वरिष्ठ नेताओं तक सीमित रहने के बजाय जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से भी नियमित संवाद स्थापित करना चाहिए। जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क और व्यक्तिगत तालमेल के बिना संगठन को सशक्त नहीं बनाया जा सकता।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस को प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभानी होगी। इसके लिए प्रदेश प्रभारी को स्वयं भी धरना-प्रदर्शन, जन आंदोलनों और सड़क पर होने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक प्रभारी स्वयं मैदान में उतरकर कार्यकर्ताओं का नेतृत्व नहीं करेगा, तब तक संगठन में नई ऊर्जा और मजबूती नहीं आएगी।

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Author: Bharat Sarathi

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