2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिले मुआवजा : वेदप्रकाश विद्रोही
बशीरपुर लॉजिस्टिक हब, मनेठी एम्स और नई आईएमटी परियोजनाओं में किसानों के साथ अन्याय का आरोप
‘विकास जरूरी, लेकिन किसानों के अधिकारों की कीमत पर नहीं’ : वेदप्रकाश विद्रोही
रेवाड़ी, 27 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर अहीरवाल के किसानों को भावनात्मक रूप से ठगकर उनकी जमीनें कम कीमत पर अधिग्रहित कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के अनुसार मुआवजा दिलाने के बजाय भाजपा नेता सरकार के साथ खड़े होकर कम मुआवजे को उचित ठहराने का काम कर रहे हैं।
विद्रोही ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास के नाम पर किसानों के साथ अन्याय किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किसानों से कम कीमत पर जमीन लेकर बाद में उसी जमीन का लाभ उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को क्यों पहुंचा रही है। उनका आरोप है कि पिछले दस वर्षों से अहीरवाल क्षेत्र में इसी तरह की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि बशीरपुर-नारनौल मल्टी लॉजिस्टिक हब के लिए किसानों से विकास और रोजगार के नाम पर जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन दस वर्ष बीत जाने के बाद भी परियोजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी। इस बीच प्रभावित किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। विद्रोही ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के भाजपा नेता किसानों का समर्थन करने के बजाय उनकी मांगों को राजनीतिक गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा बनाकर कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मनेठी-रेवाड़ी एम्स परियोजना के लिए भी किसानों की जमीन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कम कीमत पर अधिग्रहित की गई। अब पाल्हावास-रेवाड़ी नई आईएमटी के लिए भी विकास के नाम पर किसानों की जमीन सस्ते में लेने की तैयारी की जा रही है।
विद्रोही ने सवाल किया कि औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास का पूरा बोझ केवल किसानों पर ही क्यों डाला जा रहा है। यदि विकास के लिए भूमि की आवश्यकता है तो सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों के अनुसार किसानों को उचित और न्यायसंगत मुआवजा देकर ही जमीन अधिग्रहित करनी चाहिए।
उन्होंने अहीरवाल क्षेत्र से चुने गए भाजपा सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे सरकार की ओर से कम मुआवजे की पैरवी करने के बजाय किसानों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत उचित मुआवजा दिलाने की मांग के साथ खड़े हों।








