योग और श्रीमद्भगवद्गीता दोनों ही भारतीय दर्शन और जीवन पद्धति के मूल आधार हैं : डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

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श्रीमद्भगवद्गीता को मूलतः योगशास्त्र कहा जाता है, जहाँ ‘योग’ का अर्थ केवल शारीरिक आसन नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है।

12वें अंतराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय योग संवाद का समापन।

थानेसर,प्रमोद कौशिक/ संजीव कुमारी 22 जून : योग और श्रीमद्भगवद्गीता दोनों ही भारतीय दर्शन और जीवन पद्धति के मूल आधार हैं। जहां योग हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित रखता है, वहीं गीता हमें सही कर्म करने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का मार्ग दिखाती है

श्रीमद्भगवद्गीता को मूलतः योगशास्त्र कहा जाता है, जहाँ ‘योग’ का अर्थ केवल शारीरिक आसन नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। 12वें अंतराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर योग एवं श्रीमद्भगवद्गीता विषय पर आयोजित योग संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्जवलन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने विभिन्न आसन योग क्रियाओं का अभ्यास किया।

मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने योग संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गीता में योग का अर्थ केवल शारीरिक आसन नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है। गीता में योग, जीवन जीने की एक उत्कृष्ट कला और मुक्ति का मार्ग है। योग और श्रीमद्भगवद्गीता दोनों ही भारतीय दर्शन और जीवन पद्धति के मूल आधार हैं। जहां योग हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित रखता है, वहीं गीता हमें सही कर्म करने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का मार्ग दिखाती है। योग दुनिया में रहने का एक तरीका है और साथ ही आंतरिक शांति या मन की शांति बनाए रखता है, जो गीता हमें सिखाती है कि ये सभी योग एक-दूसरे के पूरक हैं, जहाँ ज्ञान, कर्म और भक्ति का संतुलन ही जीवन को सार्थक और दुखों से मुक्त बनाता है। गीता हमें यह सिखाती है कि जीवन के संघर्षों में कैसे विचलित हुए बिना सही कर्म किया जाए, और योग हमें उस ज्ञान को अपने आचरण में उतारने की मानसिक शक्ति और क्षमता प्रदान करता है।

योग संवाद कार्यक्रम में संदीप कुमार एवं अर्चना जांगड़ा बतौर अति विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कैथल के व्यवसायी विनोद गोयल सपरिवार योग संवाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वन्देमातरम से हुआ।

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Author: Bharat Sarathi

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