तेल बचत के नाम पर धरना-प्रदर्शनों पर रोक लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन : वेदप्रकाश विद्रोही

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मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों की ईंधन खपत का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग

तेल बचत की आड़ में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर हमला: विद्रोही

रेवाडी, 18 जून 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार द्वारा सितंबर तक प्रदेश में धरना-प्रदर्शनों और राजनीतिक रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी  से सवाल किया कि तेल बचत के नाम पर किए गए अभियानों के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वास्तव में कितनी ईंधन बचत हुई है, इसके आंकड़े भी जनता के सामने रखे जाने चाहिए।

विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा एक दिन ट्रेन से दिल्ली यात्रा करने और एक दिन साइकिल चलाने जैसे कार्यक्रम केवल “मीडिया फोटो इवेंट” बनकर रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने तेल बचत का तर्क देकर राजनीतिक दलों और आम नागरिकों के धरना-प्रदर्शन तथा रैलियों पर रोक लगाकर उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया है।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों के विरोध में होने वाले धरना-प्रदर्शनों और रैलियों को किसी सरकारी आदेश के माध्यम से कैसे रोका जा सकता है। उनके अनुसार भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम और सरकारी आयोजन बिना किसी रोक-टोक के जारी हैं, जबकि विपक्षी दलों और आम जनता के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

विद्रोही ने कहा कि यदि आम नागरिक अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध भी न कर सकें, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी संसाधनों और बड़े आयोजनों के माध्यम से अपना राजनीतिक प्रचार कर रही है, जबकि विपक्ष और जनता के विरोध के अधिकार को सीमित किया जा रहा है।

ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सितंबर तक धरना-प्रदर्शनों और रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही यदि सरकार वास्तव में ईंधन बचत के प्रति गंभीर है तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या न्यूनतम की जाए तथा कथनी और करनी में समानता दिखाई जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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