जलभराव से उद्योगों पर संकट, उद्यमियों ने प्रशासन को चेताया—समय रहते हों ठोस इंतजाम

गुरुग्राम। मानसून की आहट के साथ ही गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव की आशंकाएं एक बार फिर गहराने लगी हैं। सेक्टर-14 स्थित आईडीसी (इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सेंटर) क्षेत्र के उद्यमियों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से ड्रेनेज एवं सीवर सिस्टम को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग उठाई है, ताकि हर वर्ष बारिश के दौरान पैदा होने वाली गंभीर समस्याओं से राहत मिल सके।
आईडीसी के प्रधान धर्मसागर ने कहा कि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर उद्यमी वर्षों से संबंधित विभागों के समक्ष आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। बैठकें तो होती हैं, परंतु योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल पातीं। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों से आईडीसी क्षेत्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे उद्यमियों में निराशा बढ़ रही है और कई उद्योगपति यहां से अपना कारोबार अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा औद्योगिक क्षेत्र तालाब का रूप ले लेता है। सड़कों पर कई फीट तक पानी भर जाने से फैक्ट्रियों का संचालन प्रभावित होता है और हजारों श्रमिकों व कर्मचारियों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जलभराव के कारण उत्पादन गतिविधियां बाधित होती हैं, जिससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
धर्मसागर ने कहा कि सेक्टर-14 आईडीसी गुरुग्राम का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य करने आते हैं। खराब सड़कों और गहरे गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, जाम सीवर और ओवरफ्लो की स्थिति में गंदा पानी फैक्ट्रियों के भीतर पहुंचने का जोखिम रहता है, जिससे कच्चा माल और तैयार उत्पाद दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
उद्यमियों ने प्रशासन से मांग की है कि मानसून की पहली बारिश से पहले पूरे क्षेत्र के सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क की पोकलेन एवं सक्शन मशीनों से व्यापक सफाई कराई जाए। साथ ही सड़कों के गड्ढों की तत्काल मरम्मत की जाए और जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त वॉटर पंप तैनात किए जाएं।
उद्यमियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाता है, तो आईडीसी क्षेत्र को हर वर्ष आने वाले जलभराव संकट से बचाया जा सकता है और उद्योगों की उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोका जा सकता है।








