सरकार जनसमस्याओं का समाधान करे, आवाज दबाने की कोशिश न करे; प्रतिबंध वापस न हुआ तो होगा व्यापक जनसंघर्ष
गुरुग्राम, 18 जून। केंद्रीय मजदूर संगठन ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) ने हरियाणा सरकार द्वारा सितंबर माह तक प्रदेश में धरना, प्रदर्शन और रैलियों पर रोक लगाने के आदेश की कड़ी निंदा की है। एआईयूटीयूसी हरियाणा राज्य कमेटी के सचिव कॉमरेड हरिप्रकाश ने जारी बयान में कहा कि सरकार का यह फैसला प्रदेश की मेहनतकश जनता, मजदूरों और कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि धरना, प्रदर्शन और रैली लोकतांत्रिक व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं तथा जनता को अपनी समस्याओं और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। सरकार की नीतियों के कारण लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन उनका समाधान करने के बजाय सरकार विरोध के लोकतांत्रिक माध्यमों पर ही प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रही है। यह कदम अलोकतांत्रिक, एकतरफा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
कॉमरेड हरिप्रकाश ने आरोप लगाया कि यह आदेश लोकतंत्र का गला घोंटने वाला तथा पीड़ित और शोषित वर्गों की आवाज को दबाने वाला है। उन्होंने कहा कि असहनीय परिस्थितियों से उपजी जनभावनाओं और संघर्ष की आवाज को प्रतिबंधों के माध्यम से दबाया नहीं जा सकता।
एआईयूटीयूसी ने सरकार से मांग की है कि वह मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता की लंबित समस्याओं एवं मांगों का समाधान करे। यदि सरकार ऐसा करने में असमर्थ है तो धरना-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल वापस लेकर नागरिकों के शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करे।
कॉमरेड हरिप्रकाश ने चेतावनी दी कि यदि सरकार यह प्रतिबंध वापस नहीं लेती है तो प्रदेश के मजदूर और कर्मचारी अपनी मांगों को उठाना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि एआईयूटीयूसी भी इस अलोकतांत्रिक निर्णय के खिलाफ लोकतांत्रिक ढंग से व्यापक जनसंघर्ष संगठित करने के लिए बाध्य होगी।
उन्होंने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिकों, मजदूरों और मेहनतकश जनता से इस स्थिति के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठाने का आह्वान किया, ताकि सरकार प्रतिबंध लगाने के बजाय जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करे।
कॉमरेड हरिप्रकाश ने यह भी कहा कि प्रदेश में प्रतिबंध लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों का हवाला दिया जाना आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि किसी स्वतंत्र राष्ट्र की संप्रभुता पर हुए हमलों के संबंध में केंद्र सरकार की चुप्पी भारत की साम्राज्यवाद-विरोधी परंपरा के अनुरूप नहीं है। साथ ही हाल की घटनाओं में भारतीय नाविकों की मृत्यु के मुद्दे पर अपेक्षित और ठोस प्रतिक्रिया का अभाव भी चिंताजनक है, जिस पर देशवासियों को अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए।







