सितंबर तक धरना, प्रदर्शन और रैलियों पर प्रतिबंध के फैसले की कड़ी निंदा, जनआंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़, 17 जून। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में सितंबर माह तक धरना, प्रदर्शन एवं रैलियों पर रोक लगाने के आदेश का एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।
पार्टी के हरियाणा राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने जारी बयान में कहा कि सरकार का यह आदेश अलोकतांत्रिक है और संविधान की भावना तथा न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतंत्र का गला घोंटने वाला है। धरना, प्रदर्शन और रैलियां लोकतांत्रिक व्यवस्था की ऑक्सीजन हैं तथा जनता को अपनी समस्याओं और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण आम जनता से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इनका समाधान करने के बजाय सरकार जनता की आवाज को दबाने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है। समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के मौलिक अधिकार पर रोक लगाना फासिस्ट और तानाशाही सोच को दर्शाता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने मांग की है कि हरियाणा सरकार धरना-प्रदर्शन और रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले तथा जनता के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) इस फैसले के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेगी और अन्य लोकतांत्रिक शक्तियों को साथ लेकर संघर्ष का रास्ता अपनाएगी।








