गुरुग्राम, 17 जून। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने मानसून से पहले भाखड़ा डैम में बढ़ते जलस्तर को लेकर हरियाणा सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से भाखड़ा डैम का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है, जबकि राज्य सरकार संभावित बाढ़ संकट को लेकर पर्याप्त सतर्कता नहीं दिखा रही है।
दुष्यंत चौटाला ने चेतावनी देते हुए कहा कि पिछले वर्षों में आई विनाशकारी बाढ़ से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस बार भी किसानों की फसलें और सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी।
उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस अवधि में भाखड़ा डैम का सामान्य जलस्तर लगभग 1543 फुट रहता है, जबकि वर्तमान में यह 1578 फुट तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार डैम का जलस्तर सामान्य स्तर से 35 फुट अधिक है और पिछले वर्षों की बाढ़ के दौरान दर्ज स्तर से भी लगभग 20 फुट ऊपर है। उन्होंने कहा कि गोबिंद सागर झील के विशाल जलग्रहण क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण भारी मात्रा में अतिरिक्त पानी जमा हो चुका है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक मानसून की पहली व्यापक बारिश भी नहीं हुई है, लेकिन जलाशय पहले से ही क्षमता के करीब पहुंच रहे हैं। ऐसे में जब मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा तो अतिरिक्त पानी के प्रबंधन की चुनौती और बढ़ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अतिरिक्त पानी के संरक्षण और उपयोग की कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है और प्रशासन तब सक्रिय होता है जब बाढ़ से जन-धन का नुकसान हो चुका होता है।
दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा और पंजाब की सरकारों पर जल संसाधनों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) और पानी के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तो होती है, लेकिन अतिरिक्त जल के वैज्ञानिक उपयोग और संरक्षण की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि एक ओर भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ के अतिरिक्त पानी को भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) के लिए उपयोग करने की कोई व्यापक योजना दिखाई नहीं देती।
उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार और केंद्र का जल संसाधन मंत्रालय तत्काल पंजाब सरकार तथा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के साथ संयुक्त आपात बैठक बुलाएं। साथ ही मानसून से पहले डैम के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से उन क्षेत्रों और नहरों में छोड़ा जाए जहां सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अतिरिक्त स्वच्छ जल को बाढ़ का कारण बनने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर भूजल रिचार्ज तंत्र विकसित किए जाएं, ताकि भविष्य में जल संकट और बाढ़ दोनों समस्याओं का समाधान किया जा सके।
प्रमुख बिंदु
भाखड़ा डैम का जलस्तर सामान्य से 35 फुट अधिक होने का दावा।
मानसून से पहले संभावित बाढ़ खतरे को लेकर सरकार को चेतावनी।
अतिरिक्त पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन और भूजल रिचार्ज की मांग।
हरियाणा, पंजाब और बीबीएमबी की संयुक्त आपात बैठक बुलाने की अपील।
किसानों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अग्रिम तैयारी पर जोर।








