एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ड्रग्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 को देश की दवा सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। यह संशोधन केवल कफ सिरप की बिक्री पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षित वितरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक पहल है।
नए नियमों के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में भी कफ सिरप तथा अन्य औषधीय सिरपों को पहले की तरह विशेष छूट के आधार पर नहीं बेचा जा सकेगा। अब इन दवाओं की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त दवा विक्रेताओं और फार्मेसियों के माध्यम से ही संभव होगा। सरकार का मानना है कि इससे अनधिकृत बिक्री, दवाओं के दुरुपयोग तथा घटिया गुणवत्ता वाली औषधियों की उपलब्धता पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारण पिछले वर्षों में सामने आए वे मामले हैं, जिनमें कुछ कफ सिरपों में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) जैसे विषैले रसायनों की मौजूदगी पाई गई थी। इन घटनाओं के कारण कई देशों में बच्चों की मौतें हुईं और भारतीय दवा उद्योग की साख पर भी प्रश्न उठे। इसके बाद दवा निर्माण और वितरण प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।

संशोधित नियमों के अनुसार दवा निर्माण इकाइयों को उन्नत गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) के कठोर मानकों का पालन करना होगा। साथ ही तरल दवाओं में डीईजी और ईजी की अनिवार्य जांच सुनिश्चित की जाएगी, जिससे बाजार में नकली, मिलावटी या निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं की पहुंच को रोका जा सके।
नए प्रावधानों का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य कफ सिरप के दुरुपयोग को रोकना भी है। कई प्रकार के कफ सिरपों का नशे के रूप में इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। सरकार का मानना है कि बिक्री पर नियंत्रण और चिकित्सकीय निगरानी से इस प्रवृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
हालांकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इस नियम के क्रियान्वयन के दौरान कुछ व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं। अनेक गांवों में न तो पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर। ऐसे में लोगों को दवा प्राप्त करने के लिए निकटवर्ती कस्बों या शहरों पर निर्भर होना पड़ सकता है। फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत है कि अल्पकालिक असुविधा की तुलना में दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर ड्रग्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 भारत की दवा सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है तो यह न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग की विश्वसनीयता को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।








