प्रदेश अध्यक्ष रहते कार्यक्रम, कार्यालय और कार्यकर्ताओं के बीच ही रहे बडौली
चंडीगढ़, 28 मई। भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली का 9 जुलाई 2024 से 28 मई 2026 तक का 688 दिनों का कार्यकाल पार्टी के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव 2024 के बाद हरियाणा भाजपा राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही थी और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनने लगा था, उस कठिन दौर में संगठन की कमान संभालने वाले मोहनलाल बडौली ने न केवल पार्टी में नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि अपने नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता के दम पर भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मई 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा था। चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी कर सकती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में पार्टी नेतृत्व ने मोहनलाल बडौली को हरियाणा भाजपा की कमान सौंपी।
प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद बडौली ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू किया। उन्होंने प्रदेशभर में लगातार प्रवास किए, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया और चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंक दी। इसका परिणाम 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जब भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर नया इतिहास रच दिया।
भाजपा ने पहली बार हरियाणा विधानसभा में 48 सीटों पर जीत हासिल कर नया रिकॉर्ड कायम किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना रहा कि जिस चुनाव को कांग्रेस अपने पक्ष में मानकर चल रही थी, वहां मोहनलाल बडौली के नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती ने पूरा चुनावी समीकरण बदल दिया।
विधानसभा चुनाव के बाद हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा का विजय अभियान जारी रहा। गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित प्रदेश के दस नगर निगम चुनावों में भाजपा ने 10 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि मानेसर में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। कांग्रेस इन चुनावों में पूरी तरह शून्य पर सिमट गई। इसके बाद सोनीपत, अंबाला और पंचकूला नगर निगम चुनावों में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।
मोहनलाल बडौली का कार्यकाल केवल चुनावी सफलताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर तक सक्रिय करने का कार्य भी किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रदेश के मंडलों और जिलों का कई बार दौरा किया, हजारों छोटी-बड़ी संगठनात्मक बैठकें कीं और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सहजता और उपलब्धता ने संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया।
बडौली की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वे प्रदेश प्रवास के दौरान अक्सर स्थानीय पार्टी कार्यालयों में ही रुकते थे। इससे कार्यकर्ताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश गया कि संगठन सर्वोपरि है और प्रदेशाध्यक्ष स्वयं कार्यकर्ताओं के बीच रहकर काम करना पसंद करते हैं।
उनके नेतृत्व में प्रदेश में सदस्यता अभियान को भी नई गति मिली। भाजपा ने बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में नए सदस्य जुड़े तथा सक्रिय सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली की जोड़ी भी पूरे कार्यकाल के दौरान चर्चा का विषय बनी रही। सत्ता और संगठन के बीच जिस प्रकार का तालमेल दोनों नेताओं ने स्थापित किया, उसे भाजपा शासित राज्यों में उदाहरण के तौर पर देखा जाने लगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरियाणा में सरकार और संगठन के बीच बना यह संतुलन भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं का बड़ा कारण बना।
688 दिनों के इस कार्यकाल को भाजपा कार्यकर्ता आज भी संगठनात्मक मजबूती, चुनावी सफलता और कार्यकर्ता आधारित राजनीति के स्वर्णिम दौर के रूप में याद कर रहे हैं।








