लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों को बताया “साइलेंट टैक्स”, वैट और एक्साइज ड्यूटी घटाने की उठाई मांग
चंडीगढ़, 25 मई। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार महंगाई बढ़ाकर आम जनता की कमर तोड़ने का काम कर रही है। पिछले 11 दिनों में चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी, किसान, मजदूर, व्यापारी और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 8 रुपये की बढ़ोतरी ने हर घर का बजट बिगाड़ दिया है। ईंधन महंगा होने से परिवहन, खाद्य सामग्री, खेती-किसानी और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार लगातार टैक्स और वैट के माध्यम से जनता से वसूली कर रही है, जबकि निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां अपनाई जा रही हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि सरकार को जनता पर बोझ डालने के बजाय राहत देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट और एक्साइज ड्यूटी में तत्काल कमी करनी चाहिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों का सबसे अधिक नुकसान गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग को उठाना पड़ रहा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन लोगों की आय नहीं बढ़ रही। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि वह जनता के हितों को प्राथमिकता दे, न कि कुछ निजी कंपनियों के मुनाफे को।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा आम जनता की आवाज उठाती रही है और आगे भी महंगाई, बेरोजगारी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने लगातार बढ़ रहे ईंधन के दामों को आम जनता पर लगाया गया “साइलेंट टैक्स” करार देते हुए कहा कि वैश्विक कच्चे तेल के दाम स्थिर होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों को भारी मुनाफा हो रहा है और कीमतें लगातार बढ़ाई जा रही हैं। सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार को सिर्फ तेल कंपनियों के फायदे की चिंता है।









