एडिटर्स गिल्ड की चिंता का हवाला देकर प्रेस की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
रेवाडी, 25 मई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार का मीडिया पर भारी दबाव है। उन्होंने कहा कि यह बात केवल राहुल गांधी, कांग्रेस, विपक्षी दलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा ही नहीं कही जा रही, बल्कि अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सार्वजनिक रूप से मीडिया के प्रति सरकार के कथित असहिष्णु रवैये पर गंभीर चिंता जताई है।
विद्रोही ने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया पर भी सरकार का इतना दबाव है कि वह सीधे तौर पर सरकार की आलोचना करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि गिल्ड ने अपने बयान में नार्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे गए सवालों के घटनाक्रम का हवाला देते हुए सरकार को सलाह दी कि यदि भारत में मीडिया के प्रति सरकार का रवैया असहिष्णुता वाला नहीं होता तो इस प्रकार की घटनाओं से दुनिया में भारत की छवि प्रभावित नहीं होती।
उन्होंने कहा कि विश्व के 180 देशों की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में नार्वे पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है। विद्रोही के अनुसार भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश 152वें और पाकिस्तान 153वें स्थान पर हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रेस स्वतंत्रता में शीर्ष स्थान पर रहने वाले नार्वे के पत्रकारों को भारत के “संघी दास पत्रकारों” द्वारा नसीहत देना अपने आप में विडंबना है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने सवाल उठाया कि क्या एडिटर्स गिल्ड इस संदर्भ में भारतीय पत्रकारों को सत्ता के दबाव से मुक्त होकर स्वतंत्र पत्रकारिता करने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि जब एडिटर्स गिल्ड जैसे संगठन भी कथित सरकारी दबाव के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, तब आम पत्रकारों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मीडिया पर अघोषित सेंसरशिप लागू है और अधिकांश मीडिया वही प्रकाशित या प्रसारित करता है जो केंद्र सरकार को पसंद हो। विद्रोही ने कहा कि यदि मीडिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और जनमुखी रवैया अपनाते हुए अपने पत्रकारिता धर्म का ईमानदारी से पालन करे तो सरकार की कथित असहिष्णु नीतियां अधिक समय तक नहीं टिक पाएंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा सरकार जनविरोधी और पूंजीपतियों के हितों की सरकार है तथा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया यदि पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता से अपनी भूमिका निभाए तो देश की राजनीतिक स्थिति अलग हो सकती है।









