पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर जताई चिंता
सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है : वेदप्रकाश विद्रोही
रेवाडी, 24 मई 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने देश में बढ़ती महंगाई पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले से ही आर्थिक रूप से बदहाल आमजन का जीवन और कठिन होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा सरकार महंगाई पर प्रभावी अंकुश लगाने की बजाय तेल और गैस के दाम बढ़ाकर महंगाई की आग को और भड़का रही है।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार “बड़ी चालाकी” से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर चौतरफा महंगाई को न्यौता दे रही है। उनके अनुसार पिछले दस दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम प्रति लीटर लगभग 5 रुपये तथा सीएनजी गैस करीब 4 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो चुकी है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में 15 से 20 रुपये तक और बढ़ोतरी कर सकती है। वहीं रसोई गैस पर भी महंगाई का “बम” कभी भी फूट सकता है।
उन्होंने कहा कि बीते दस दिनों में खाद्य पदार्थों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं और यदि यही स्थिति रही तो आने वाले एक माह में खाद्य वस्तुओं के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। विद्रोही ने सवाल उठाया कि महंगाई से बदहाल आमजन आखिर कैसे जीवन यापन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जनसरोकारों से ध्यान हटाने के लिए “नकली मुद्दे” खड़े कर रही है तथा बचत के नाम पर मीडिया फोटो इवेंट कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए विद्रोही ने कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिका और Donald Trump के दबाव में ईरान और रूस से सस्ता तेल खरीदने की बजाय अमेरिका से वेनेजुएला का महंगा तेल खरीद रहे हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि जब देश के 80 करोड़ लोग सरकार से मिलने वाले मुफ्त राशन पर निर्भर हों, तब बढ़ती महंगाई की मार आमजन कैसे झेल पाएगा।
उन्होंने कहा कि तेल और गैस संकट के कारण महंगाई के साथ-साथ बेरोजगारी भी बढ़ रही है। विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना को समाप्त कर गांवों में रोजगार के अवसरों को बाधित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि एक जुलाई से शुरू होने वाली कथित “जीरामजी रोजगार योजना” से गांवों में नए रोजगार पैदा नहीं होंगे।
विद्रोही ने कहा कि खाद की कमी के चलते खरीफ फसल उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे खाद्य संकट और गहरा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने खर्चे कम करने की बजाय केवल “नौटंकी” और मीडिया इवेंट कर रही है, जबकि आमजन को बचत का उपदेश दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा सरकार महंगाई और बेरोजगारी पर प्रभावी नियंत्रण करने की बजाय अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है।








