“जुमले नहीं, बताइए नसीबपुर स्मारक का निर्माण कब होगा?” — वेदप्रकाश विद्रोही
अहीरवाल के 1857 के वीरों की उपेक्षा पूरे क्षेत्र के शौर्य का अपमान : विद्रोही
रेवाड़ी, 23 मई 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि आखिर जुमलेबाजी करने की बजाय यह स्पष्ट क्यों नहीं बताया जा रहा कि नसीबपुर-नारनौल में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भव्य स्मारक निर्माण किस तिथि से शुरू होगा, यह कब तक बनकर तैयार होगा और इसके लिए हरियाणा सरकार ने कितना बजट स्वीकृत व रिलीज किया है।
विद्रोही ने कहा कि पिछले दस वर्षों से भाजपा सरकार नसीबपुर-नारनौल में 1857 के वीर सेनानियों की याद में भव्य स्मारक निर्माण का राग अलापकर अहीरवाल की जनता को भावनात्मक रूप से ठगती आ रही है, लेकिन धरातल पर आज तक एक ईंट तक नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि 16 नवंबर 1857 को राव तुलाराम के नेतृत्व में अहीरवाल, शेखावटी, मेवात और जरात क्षेत्र के लगभग पांच हजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेते हुए मातृभूमि की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। विद्रोही ने कहा कि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में वीरों की शहादत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि इन अमर शहीदों के सम्मान में भव्य स्मारक निर्माण के लिए वर्षों पूर्व कांग्रेस सरकार ने नसीबपुर-नारनौल में 42 कनाल 10 मरला भूमि भी चिन्हित की थी, लेकिन आज तक स्मारक निर्माण शुरू नहीं हो सका।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विधानसभा के भीतर और बाहर, सार्वजनिक मंचों से दर्जनों बार स्मारक निर्माण की घोषणाएं कर चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब एक बार फिर राव तुलाराम की परपोती एवं हरियाणा सरकार में मंत्री आरती राव द्वारा नसीबपुर में भव्य स्मारक बनाने का मुद्दा उठाया जा रहा है, लेकिन सरकार अब भी यह बताने से बच रही है कि स्मारक निर्माण कब शुरू होगा, इसके लिए कितना धन जारी किया गया है और यह परियोजना कब तक पूरी होगी।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार के दौरान रेवाड़ी के नाईवाली चौक, जिसे अब राव तुलाराम चौक कहा जाता है, वहां स्थापित राव तुलाराम की छोटी प्रतिमा को घोड़े पर सवार विशाल प्रतिमा के रूप में राव तुलाराम पार्क में स्थापित करने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्रीय मंत्री एवं राव तुलाराम के वंशज राव इन्द्रजीत सिंह की मौजूदगी में की थी।
उन्होंने कहा कि 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। वर्तमान प्रतिमा को हटाकर विशाल प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह गई और धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ।
विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लगातार उपेक्षा न केवल शहीदों का अपमान है, बल्कि यह पूरे अहीरवाल क्षेत्र के शौर्य, बलिदान और गौरव की भी अनदेखी है।









