एआई, ग्रीन स्किल्स और वर्कफोर्स अप-स्किलिंग पर फोकस
मुख्य सचिव ने की स्किलिंग इकोसिस्टम में सुधारों की समीक्षा

चंडीगढ़, 22 मई-हरियाणा सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था और बदलती औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य में आधुनिक, तकनीक आधारित और उद्योग उन्मुखी कौशल विकास प्रणाली तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्रीन टेक्नोलॉजी, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल स्किलिंग और उद्योग आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में बड़े सुधार लागू करने की तैयारी कर ली है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य के स्किलिंग इकोसिस्टम में किए जा रहे व्यापक सुधारों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ’‘विकसित भारत 2047’’ के विजन के अनुरूप युवाओं को भविष्य की रोजगार जरूरतों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
बैठक में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण, एआई एवं उभरती तकनीकों से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी मजबूत करने तथा उद्योग उन्मुखी कौशल तंत्र विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
श्री रस्तोगी ने कहा कि हरियाणा भविष्य उन्मुखी कौशल सुधारों और तकनीक आधारित व्यावसायिक शिक्षा को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और ग्रीन टेक्नोलॉजी वैश्विक रोजगार परिदृश्य को बदल रही हैं। ऐसे में राज्य को अपने युवाओं और कार्यबल को इन उभरते अवसरों के लिए पहले से तैयार करना होगा।
बैठक में आईटीआई के आधुनिकीकरण, एआई एवं नई तकनीकों से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने तथा उद्योग उन्मुख कौशल प्रणाली विकसित करने पर चर्चा की गई। राज्य सरकार सरकारी कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए अप-स्किलिंग पर भी काम कर रही है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम भी शुरू करने की योजना है।
बैठक में बताया गया कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के माध्यम से विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत 7,000 से अधिक अनुबंध कर्मचारियों को हरियाणा कौशल विकास मिशन (एचएसडीएम) द्वारा हरियाणा नॉलेज कॉरपोरेशन (एचकेसी) के सहयोग से सॉफ्ट स्किल्स और आईटी साक्षरता का प्रशिक्षण देकर अप-स्किल किया जा चुका है। चालू वित्त वर्ष में और कर्मचारियों को इस कार्यक्रम के तहत शामिल किया जाएगा।
राज्य सरकार अब ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए भी डिजिटल दक्षता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए विशेष अप-स्किलिंग रणनीति तैयार कर रही है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी सप्ताहों में मुख्यालय और जिला स्तर पर ड्राइवरों और चपरासियों के लिए भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने उभरती तकनीकों और औद्योगिक जरूरतों पर आधारित एक व्यापक ’स्किल गैप स्टडी’ भी शुरू कराई है। यह अध्ययन स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) को सौंपा गया है और इसकी रिपोर्ट जुलाई 2026 के पहले सप्ताह तक आने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि यह अध्ययन राज्य की प्रशिक्षण व्यवस्था को भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप ढालने में मदद करेगा।
युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव श्री राजीव रंजन ने बैठक में बताया कि पीएम-सेतु पहल के तहत सोनीपत, कुरुक्षेत्र, पलवल और छारा (झज्जर) में चार पायलट आईटीआई क्लस्टर चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें उद्योग आधारित मॉडल पर विकसित किया जाएगा। अगले तीन वर्षों में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (डीजीटी) द्वारा आवंटित सभी 12 क्लस्टरों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए अगले माह गुरुग्राम में एक इंडस्ट्री वर्कशॉप आयोजित की जाएगी।
कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित किया जा रहा है। यह पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी, ट्रैकिंग और परिणाम आधारित मूल्यांकन को अधिक प्रभावी बनाएगा।
कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग शैक्षणिक स्तर 2026-27 से आईटीआई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उभरती तकनीकों से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। वर्तमान में राज्य के व्यावसायिक प्रशिक्षण तंत्र में सोलर टेक्नीशियन और मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (एसवीएसयू), पलवल ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने ड्रोन डिजाइन एंड असेंबली, मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, पाइथन प्रोग्रामिंग, सेमीकंडक्टर डिवाइस पैकेजिंग और मशीन लर्निंग में अल्पकालिक ब्रिज कोर्स भी शुरू किए हैं।
तेजी से बढ़ते ’केयर इकोनॉमी सेक्टर’ को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार जेरियाट्रिक केयर, फिजियोथेरेपी और योग जैसे क्षेत्रों में भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि युवाओं को देश और विदेश में रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षण परिवेश को आधुनिक बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का प्रस्ताव है। इस पहल का उद्देश्य आईटीआई को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर विकसित करना और कौशल शिक्षा को अधिक आकर्षक बनाना है।
युवाओं को कार्यस्थल के लिए बेहतर रूप से तैयार करने के उद्देश्य से आईटीआई में ’एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स’ पाठ्यक्रम के तहत सॉफ्ट स्किल्स और डिजिटल स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग ने ’एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स’ प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु वाधवानी फाउंडेशन और क्वेस्ट एलायंस के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किए हैं। इसके साथ ही हितधारकों के परामर्श से हरियाणा के कौशल विकास तंत्र को राष्ट्रीय ’विजन 2047’ के अनुरूप विकसित करने के लिए विस्तृत पांच वर्षीय और दस वर्षीय रणनीतिक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।









