तीसरे-चौथे बच्चे पर प्रोत्साहन राशि के प्रस्ताव की जनवादी महिला समिति ने की कड़ी निंदा

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महिलाओं के अधिकारों और स्वायत्तता पर हमला बताया प्रस्ताव

जनवादी महिला समिति ने कहा— स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे सरकार

गुरुग्राम, 20 मई। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, हरियाणा ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा राज्य में घटती जन्म दर को बढ़ाने के उद्देश्य से तीसरे बच्चे के लिए 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के लिए 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने संबंधी बयान की कड़ी निंदा की है।

समिति ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकार का प्रतिगामी प्रस्ताव सामने आना बेहद चौंकाने वाला और अस्वीकार्य है। यह बयान महिलाओं की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की अनदेखी को दर्शाता है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं खाद्य असुरक्षा, एनीमिया और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही हैं।

समिति का कहना है कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी महिलाओं और परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, उचित पोषण, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि ऐसी नीतियों को बढ़ावा देना जो महिलाओं के जीवन और गरिमा को और अधिक संकट में डालें।

जनवादी महिला समिति ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव महिलाओं के शरीर पर उनके स्वायत्त अधिकार को कमजोर करता है और उन्हें केवल जनसंख्या वृद्धि का माध्यम बनाकर देखता है। समिति के अनुसार यह मातृ मृत्यु दर, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज करता है।

समिति ने कहा कि प्रसव को आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़ना महिलाओं के शरीर पर पितृसत्तात्मक नियंत्रण को मजबूत करने जैसा है और यह प्रजनन स्वायत्तता के लिए दशकों से चले आ रहे संघर्ष को कमजोर करता है।

बयान में कहा गया कि ऐसे समय में जब देश बेरोजगारी, गरीबी और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करना गरीब-विरोधी और समाज-विरोधी कदम है।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों, महिला संगठनों और नागरिक समाज से इस महिला-विरोधी प्रस्ताव का विरोध करने का आह्वान किया है। समिति ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के शरीर जनसंख्या नियंत्रण या वृद्धि के उपकरण नहीं हैं और स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार तथा शारीरिक स्वायत्तता जैसे मूलभूत मुद्दों को संबोधित किए बिना प्रसव को प्रोत्साहित करने की कोई भी नीति महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

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Author: Bharat Sarathi

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