आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, पशु अधिकारों के साथ संतुलन पर जोर

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

गोंदिया/नई दिल्ली, 20 मई। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को आवारा कुत्तों और डॉग बाइट मामलों से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को भयमुक्त और सुरक्षित जीवन का अधिकार प्राप्त है, इसलिए सार्वजनिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह मामला केवल आवारा कुत्तों के पुनर्वास या नसबंदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनसुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी संवैधानिक बहस बन गया। अदालत ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को सामान्य नहीं माना जा सकता।

अदालत ने राज्यों और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर प्रबंधन की व्यवस्थाएं बेहद कमजोर हैं। कई राज्यों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी पाई गई।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि संवेदनशील सार्वजनिक क्षेत्रों से पकड़े गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें शेल्टर होम या पुनर्वास केंद्रों में रखा जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी रही—“लोगों की जान सबसे पहले है।” न्यायालय ने कहा कि पशु संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर मानव जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता।

महाराष्ट्र के एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी ने इस फैसले को भारतीय न्यायिक इतिहास का ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि यह केवल “डॉग बाइट केस” नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या और जनसुरक्षा बनाम पशु अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने वाला फैसला है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आधुनिक शेल्टर होम, व्यापक टीकाकरण, नसबंदी कार्यक्रम और वैज्ञानिक पुनर्वास नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों की अनदेखी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में नगर निकायों, राज्य सरकारों, पशु कल्याण संगठनों और नागरिक समाज के लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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