“हरियाणा से बाहर के लोगों को नौकरी, हरियाणवियों को बेरोजगारी और विदेशों में मजदूरी की मजबूरी” — सुरजेवाला

चंडीगढ़, 12 मई 2026। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा की नायब सैनी सरकार पर प्रदेश के युवाओं के रोजगार अधिकारों के साथ “संगठित अन्याय” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुनियोजित तरीके से क्लास-1 से क्लास-3 तक के महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों की भर्ती कर हरियाणा के युवाओं के हक पर “दिनदहाड़े डाका” डाल रही है।
सुरजेवाला ने तंज कसते हुए कहा कि अब हरियाणा के हर युवा की जुबान पर भाजपा सरकार का यही फॉर्मूला है —
“चपरासी हमारे, अफसर बाहर के।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार हरियाणा के सामान्य वर्ग के युवाओं को बेरोजगारी की ओर धकेल रही है और “ना पर्ची, ना खर्ची” का नारा केवल राजनीतिक छलावा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल खट्टर के शासनकाल से लेकर वर्तमान नायब सैनी सरकार तक हर भर्ती प्रक्रिया में हरियाणा के युवाओं की उपेक्षा की गई है।
“हर भर्ती में 70-80 प्रतिशत बाहरी उम्मीदवार”

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और Haryana Staff Selection Commission (HSSC) के माध्यम से होने वाली अधिकांश भर्तियों में 70 से 80 प्रतिशत तक चयन बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों का किया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज कैडर), हिंदी विषय के 139 पदों की भर्ती प्रक्रिया में सामान्य वर्ग के 67 पदों में से भरे गए 60 पदों में 41 पदों पर हरियाणा से बाहर के उम्मीदवारों का चयन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार यह मानती है कि हरियाणा के युवा हिंदी पढ़ाने के योग्य नहीं हैं।
साइकोलॉजी भर्ती पर भी सवाल
सुरजेवाला ने बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज कैडर), साइकोलॉजी विषय में 85 पदों की भर्ती निकाली गई थी, जिसमें सामान्य वर्ग के 44 पद शामिल थे। लेकिन परिणाम में केवल 2 उम्मीदवारों को योग्य घोषित किया गया और शेष सभी को अयोग्य बता दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति, बीसीए, बीसीबी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के अधिकांश पद भी खाली छोड़ दिए गए। उनके अनुसार सरकार की नीति साफ है —
“या तो बाहरी उम्मीदवारों की भर्ती करो, या फिर पद खाली रखो।”
“हरियाणा के युवा विदेशों में मजदूरी को मजबूर”
सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश के पढ़े-लिखे और मेधावी युवा रोजगार के अभाव में विदेशों में मजदूरी करने को मजबूर हैं, जबकि बाहरी राज्यों के लोगों को हरियाणा में अधिकारी बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे हरियाणवियों को “दूसरे दर्जे का नागरिक” बनाने की रणनीति बताया।
कई भर्तियों में बाहरी उम्मीदवारों के चयन का आरोप
सुरजेवाला ने दावा किया कि विभिन्न विभागों की भर्तियों में भी यही पैटर्न अपनाया गया—
- टॉवर यूटिलिटीज में असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती के 214 सामान्य वर्ग पदों में 185 बाहरी उम्मीदवार चयनित।
- सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता (सिविल) भर्ती के 49 सामान्य वर्ग पदों में 28 बाहरी उम्मीदवार चयनित।
- एएमओ भर्ती में लगभग 75 प्रतिशत पदों पर बाहरी उम्मीदवारों का चयन।
- सिविल जज भर्ती के 110 पदों में 60 बाहरी उम्मीदवार चयनित।
- तकनीकी शिक्षा विभाग में प्राध्यापक भर्ती के 153 सामान्य वर्ग पदों में 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित।
- HCS भर्तियों में 40 प्रतिशत से अधिक चयन बाहरी उम्मीदवारों का होने का आरोप।
उन्होंने 2019 की बिजली विभाग SDO भर्ती और असिस्टेंट प्रोफेसर पॉलिटिकल साइंस भर्ती का भी उल्लेख किया, जिनमें कथित रूप से बाहरी उम्मीदवारों की संख्या अधिक रही।
“हरियाणा की संस्कृति और भाषा को महत्व नहीं”
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा देश का शायद एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ सरकारी नौकरियों की परीक्षा में हरियाणा की भाषा, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और भौगोलिक जानकारी से जुड़े प्रश्नों को महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि प्रदेश की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को समझने वाले युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डोमिसाइल नियमों में बदलाव पर भी हमला
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने हरियाणा निवासी प्रमाण पत्र की अवधि 10 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी, जिससे बाहरी राज्यों के लोग भी अब आरक्षित वर्गों के पदों पर दावा करने लगे हैं। उन्होंने इसे हरियाणा के दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर चोट बताया।
HPSC चेयरमैन के बयान पर नाराज़गी
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा लोक सेवा आयोग के चेयरमैन द्वारा हरियाणा के युवाओं को “फेलियर” और “अयोग्य” बताए जाने वाले कथित बयान प्रदेश के युवाओं का अपमान हैं।
जांच और माफी की मांग
अंत में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मांग की कि हरियाणा की भर्ती प्रक्रियाओं की व्यापक जांच करवाई जाए तथा मुख्यमंत्री नायब सैनी प्रदेश के युवाओं से सार्वजनिक माफी मांगें। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में हरियाणा की भाषा, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जाए ताकि प्रदेश के युवाओं को न्यायसंगत अवसर मिल सके।









