14 मई को 13 जिलों में होगी राज्यव्यापी बाढ़ मॉक ड्रिल

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एनडीएमए के सहयोग से आयोजित होगी राज्य की अब तक की सबसे बड़ी आपदा प्रबंधन एक्सरसाइज़

बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए सिस्टम, संसाधनों और सामुदायिक भागीदारी को किया जाएगा मजबूत

चंडीगढ़, 12 मई – हरियाणा सरकार द्वारा 14 मई को बाढ़ संभावित 13 जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर राज्य स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सहयोग से आयोजित यह अभ्यास राज्य का अब तक का सबसे बडा आपदा तैयारी अभ्यासों में से एक माना जा रहा  है।

यह व्यापक अभ्यास 2023 और 2025 में आई बाढ़ से मिले अनुभवों के आधार पर राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों, एजेंसियों और समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने मॉक ड्रिल से पहले आयोजित टेबल टॉप एक्सरसाइज़ और ओरिएंटेशन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार अब केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी और रोकथाम पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि यह अभ्यास केवल औपचारिक सिमुलेशन नहीं, बल्कि हरियाणा की भविष्य में बाढ़ जैसी आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को मजबूत करने की एक व्यावहारिक पहल है। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना, समय पर समन्वय और सामूहिक प्रयासों से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यह बाढ़ मॉक ड्रिल गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर जिलों में आयोजित की जाएगी। प्रत्येक जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर अभ्यास कराया जाएगा, ताकि विभिन्न स्तरों पर तैयारियों, संसाधनों और प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

डॉ मिश्रा ने बताया कि इस अभ्यास में विभिन्न सरकारी विभागों, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं, फायर एवं इमरजेंसी सेवाओं, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से भाग लेंगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे एजेंसियों के बीच तालमेल और आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

मॉक ड्रिल की विशेषता सामुदायिक भागीदारी और जमीनी स्तर की सहभागिता होगी। आपदा मित्र स्वयंसेवक, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवक, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, नेहरू युवा केंद्र संगठन तथा विभिन्न स्थानीय गैर-सरकारी संगठन भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि जनसहभागिता और जागरूकता के बिना आपदा प्रबंधन सफल नहीं हो सकता। उन्होंने सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आमजन यह समझ सकें कि यह एक पूर्व निर्धारित अभ्यास है, न कि वास्तविक आपात स्थिति। उन्होंने अभ्यास के दौरान आम लोगों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

इस अभ्यास को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा। एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर रविंदर गुरुंग (सेवानिवृत्त) राज्य मुख्यालय से पूरी एक्सरसाइज़ की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी मुक्ता राम डेका और किशोर दत्ता भी इसमें भाग लेंगे। यह आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में राज्यों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

जिला प्रशासन को इंडिया डिज़ास्टर रिसोर्स नेटवर्क पोर्टल पर उपलब्ध संसाधनों की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संकट की स्थिति में सभी संसाधन तुरंत उपलब्ध और उपयोग योग्य हों।

हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभ्यास केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। डॉ. सुमिता मिश्रा ने निर्देश दिए कि टेबल टॉप एक्सरसाइज़ और 14 मई की मॉक ड्रिल से प्राप्त अनुभवों और सुझावों का दस्तावेजीकरण किया जाए तथा उन्हें भविष्य की आपदा प्रबंधन नीतियों और रणनीतियों में शामिल किया जाए।

सरकार, प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और सामुदायिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से हरियाणा स्वयं को एक अधिक सक्षम, सतर्क और आपदा-तैयार राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है। 14 मई की यह राज्यव्यापी एक्सरसाइज़ आपदा प्रबंधन व्यवस्था को केवल प्रतिक्रिया आधारित प्रणाली से आगे बढ़ाकर तैयारी, जागरूकता और मजबूती की संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

एनडीआरएफ के सदस्य श्री कृष्ण एस. वत्स ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समय पर चेतावनी प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने की कुंजी है।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री दुष्मंत कुमार बेहरा, विशेष सचिव श्री राहुल हुड्डा, पश्चिमी कमान चंडीमंदिर के नागरिक-सैन्य मामलों के सलाहकार कर्नल जे. एस. संधू, भटिंडा स्थित 7वीं बटालियन एनडीआरएफ के द्वितीय कमान अधिकारी श्री ऋषि महाजन तथा आईएमडी चंडीगढ़ के मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक श्री सुरेन्द्र पॉल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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