“खुद मियां फजीहत, दूसरों को नसीहत” — वेदप्रकाश विद्रोही
रेवाडी, 12 मई 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर दोहरे आचरण का आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता को तेल, गैस और खर्चों में कटौती की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री स्वयं अपनी कही बातों पर अमल नहीं करते। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आम लोगों को मितव्ययिता और बचत का उपदेश देती है, जबकि खुद सरकारी संसाधनों का राजनीतिक और निजी प्रचार के लिए खुलकर इस्तेमाल कर रही है।
विद्रोही ने कहा कि ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण भारत सहित दुनिया भर में तेल और गैस संकट गहरा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा तेल बचाने की अपील करना और दूसरी ओर बड़े-बड़े रोड शो में सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालना विरोधाभासी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु, तेलंगाना और गुजरात में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए भारी मात्रा में पेट्रोल-डीजल खर्च किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश आर्थिक दबाव और तेल संकट से गुजर रहा है, तो असम में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह को अत्यधिक भव्य बनाने की क्या आवश्यकता थी। विद्रोही के अनुसार भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वीआईपी नेताओं के विमानों, हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा इंतजामों पर करोड़ों रुपये का खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि यह समारोह सादगी से भी आयोजित किया जा सकता था।
वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री के आगामी विदेशी दौरों पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब सरकार जनता से बचत करने, कम ईंधन खर्च करने और विलासिता से बचने की अपील कर रही है, तब विदेशी दौरों पर करोड़ों रुपये खर्च करना किस प्रकार उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि संकट की स्थिति है, तो बचत का नियम केवल आम जनता पर ही लागू क्यों हो।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार आम नागरिकों को पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, गैस बचाने, सोना न खरीदने और किसानों को खाद के उपयोग तक में कटौती की सलाह दे रही है, जबकि सत्ता में बैठे लोग सरकारी संसाधनों का खुलकर उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री के बचत संबंधी संदेशों का जनता पर असर पड़ना मुश्किल है।









