हृदय सम्राट बाबा हरदेव सिंह को अर्पित ‘समर्पण दिवस’ 13 मई को

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बाबा हरदेव सिंह की पावन स्मृति में समालखा में होगा विशाल संत समागम, देश-विदेश से जुटेंगे श्रद्धालु और मानवता प्रेमी

गुरुग्राम, 11 मई 2026। मानवता, प्रेम, विनम्रता और आध्यात्मिक जागृति के अद्वितीय प्रतीक बाबा हरदेव सिंह की पावन स्मृति को समर्पित ‘समर्पण दिवस’ का भावपूर्ण आयोजन बुधवार, 13 मई 2026 को हरियाणा के संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं श्रद्धेय निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में सायं 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक संपन्न होगा। इसके उपरांत श्रद्धालु सतगुरु माता जी के आशीर्वचनों का श्रवण करेंगे।

इस विशाल संत समागम में देश-विदेश से आए श्रद्धालु, भक्तगण एवं मानवता प्रेमी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के पुष्प अर्पित करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण संत निरंकारी मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी किया जाएगा, जिससे विश्वभर के श्रद्धालु इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

बाबा हरदेव सिंह केवल संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक गुरु ही नहीं थे, बल्कि वे प्रेम, करुणा, सहजता और मानवीय संवेदनाओं के सजीव प्रतीक थे। उनकी मधुर मुस्कान, विनम्र व्यक्तित्व और दिव्य वाणी ने असंख्य लोगों को आत्मिक शांति एवं जीवन का नया दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने मानव जीवन को आत्मज्ञान से आलोकित करते हुए यह संदेश दिया कि सच्चा जीवन वही है, जो प्रेम, सेवा, सहअस्तित्व और समर्पण से परिपूर्ण हो।

उनके दिव्य नेतृत्व में संत निरंकारी मिशन ने समाज सेवा को आध्यात्मिकता का अभिन्न अंग बनाते हुए रक्तदान, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने जैसे अनेक लोककल्याणकारी कार्य किए। बाबा जी का मानना था कि ईश्वर की सच्ची भक्ति मानव सेवा के माध्यम से ही सार्थक होती है।

लगभग 36 वर्षों तक मिशन का नेतृत्व करते हुए बाबा हरदेव सिंह ने मिशन को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज संत निरंकारी मिशन 67 से अधिक देशों में आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण का संदेश प्रसारित कर रहा है। उनकी दूरदर्शिता और सेवा भावना के कारण मिशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान प्राप्त हुई तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सामाजिक एवं आर्थिक परिषद में सलाहकार का सम्मान मिला।

उन्होंने “एकत्व में सद्भाव”, “वसुधैव कुटुम्बकम” और “एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ” जैसे संदेशों के माध्यम से संपूर्ण मानवता को प्रेम और एकता के सूत्र में बाँधने का प्रयास किया। उनका “दीवार रहित संसार” का स्वप्न आज भी विश्व बंधुत्व, समानता और सार्वभौमिक प्रेम की प्रेरणा बनकर लोगों के हृदयों को आलोकित कर रहा है।

वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उसी दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रेम, सेवा, संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश जन-जन तक पहुँचा रही हैं। उनके करुणामयी सान्निध्य में संत निरंकारी मिशन निरंतर मानवता को आत्मबोध, नैतिकता और विश्व बंधुत्व के मार्ग पर अग्रसर कर रहा है।

‘समर्पण दिवस’ केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उस दिव्य जीवन-दर्शन को आत्मसात करने का पावन पर्व है, जो मानवता को प्रेम, सेवा, विनम्रता और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह दिवस प्रत्येक हृदय को यह स्मरण कराता है कि महान आत्माएं अपने कर्म, विचार और आदर्शों के माध्यम से सदैव जीवित रहती हैं तथा युगों तक मानवता का मार्ग आलोकित करती रहती हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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