बढ़ते वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री ने कहा — ईंधन बचत अब केवल विकल्प नहीं, राष्ट्रीय जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 10 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित वैश्विक तेल संकट के मद्देनज़र देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का संयमित उपयोग करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम करनी होगी। उन्होंने नागरिकों से अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने, कार पूलिंग अपनाने, ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर जोर देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत से न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पीएम मोदी ने लोगों से बिजली, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के उपयोग में अनुशासन और जागरूकता अपनाने की अपील करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में केंद्र सरकार ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक संसाधनों पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
ऊर्जा बचत को जनआंदोलन बनाने का संदेश
प्रधानमंत्री की इस अपील को देश में ऊर्जा बचत अभियान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार आने वाले समय में वैकल्पिक ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता से जुड़े अभियानों को और तेज कर सकती है।









