भाजपा-संघ के खिलाफ व्यापक संघर्ष का शंखनाद, संविधान और लोकतंत्र पर मंडरा रहे खतरे को लेकर जताई चिंता
गुरुग्राम, 9 मई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि गुरुग्राम में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में चल रही सद्भाव यात्रा में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भागीदारी ने न केवल भाजपा-संघ के खिलाफ व्यापक संघर्ष का शंखनाद किया है, बल्कि हरियाणा में कांग्रेस की एकजुटता की मजबूत नींव भी रख दी है।
विद्रोही ने कहा कि सद्भाव यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने हरियाणा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर भाजपा-संघ सरकार की जनविरोधी नीतियों और फासीवादी सोच के खिलाफ संघर्ष करने का स्पष्ट संदेश दिया। इससे हरियाणा कांग्रेस की कार्यशैली और संघर्ष क्षमता में गुणात्मक परिवर्तन आना तय है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के संदेश ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश और उत्साह भर दिया है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में साफ तौर पर कहा कि देश में संघी फासीवाद का मुकाबला केवल कांग्रेस ही कर सकती है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोटों की चोरी के माध्यम से सत्ता पर कब्जा बनाए रखने का प्रयास कर रही है, जबकि संविधान और लोकतंत्र दोनों गंभीर खतरे में हैं।
वेदप्रकाश विद्रोही ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 27 लाख मतदाताओं को संदिग्ध मतदाता बताकर मतदान के अधिकार से वंचित करना खुली “वोट चोरी” है। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदान जैसे मौलिक अधिकार को छीने जाने पर भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप न करना आश्चर्यजनक है।
उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि एक सीट पर उम्मीदवार का केवल एक वोट से जीतना यह साबित करता है कि लोकतंत्र में हर वोट कितना महत्वपूर्ण होता है। वहीं बंगाल में लाखों मतदाताओं को वोट देने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
विद्रोही ने तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के बावजूद टीवीके नेता विजय को राज्यपाल द्वारा सरकार गठन के लिए आमंत्रित न करना संविधान और जनादेश की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि जब किसी अन्य दल ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया, तब राज्यपाल संवैधानिक रूप से टीवीके को आमंत्रित करने के लिए बाध्य थे।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के घटनाक्रम यह साबित करते हैं कि देश में लोकतंत्र और संविधान दोनों खतरे में हैं। विद्रोही ने राहुल गांधी के उस बयान को सही ठहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि आज भारत में संविधान की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।









