अतिरिक्त आयुक्त शालिनी चेतल बोलीं — “माँ हमारी पहली गुरु, उसका ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता”

हिसार, 8 मई। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में मातृ दिवस अत्यंत हर्षोल्लास, भावनात्मक वातावरण और गरिमामय ढंग से मनाया गया। कार्यक्रम में मातृत्व की महानता, माँ के त्याग, प्रेम और संस्कारों को भावपूर्ण शब्दों में याद करते हुए मातृशक्ति को नमन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि “माँ सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम, त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति है। माँ के चरणों में ही स्वर्ग बसता है और उसकी ममता जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।” उन्होंने उपस्थित सभी वरिष्ठ माताओं को प्रणाम करते हुए कहा कि उनकी झुर्रियों में अनुभव और आँखों में अथाह ममता छिपी है।

मुख्य अतिथि नगर निगम हिसार की अतिरिक्त आयुक्त श्रीमती शालिनी चेतल का स्वागत करते हुए डॉ. डांग ने कहा कि एक बेटी और माँ होने के नाते वे मातृत्व की भावनाओं और जिम्मेदारियों को भली-भाँति समझती हैं। उन्होंने कहा कि माँ स्वयं हर दुख सह लेती है, लेकिन अपने बच्चों पर आँच नहीं आने देती।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन श्रीमती वीना अग्रवाल, डॉ. सुनीता सुनेजा एवं डॉ. कमलेश कुकरेजा ने संयुक्त रूप से किया। वीना अग्रवाल ने कहा कि माँ परिवार की आत्मा होती है। उन्होंने मातृ दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिवस हर वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को माताओं के निस्वार्थ प्रेम और त्याग को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने अमेरिका की एना जार्विस द्वारा अपनी समाजसेवी माता एन जार्विस की स्मृति में इस दिवस की शुरुआत का उल्लेख किया।

वीना अग्रवाल ने अपने संबोधन में एकल माता और सरोगेट माता की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है कि समाज में वृद्धाश्रमों में माताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “एक माँ दस बच्चों को पाल सकती है, लेकिन दस बच्चे एक माँ को नहीं रख सकते।”
डॉ. कमलेश कुकरेजा ने अपनी पंक्तियों में कहा—
“ममता की मूरत और संघर्ष की कहानी है,
माँ तू भगवान की दी हुई सबसे अनमोल निशानी है।”
डॉ. सुनीता सुनेजा ने कहा कि माँ शब्द में ही पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है। ममता, त्याग, समर्पण, संस्कार, सहनशीलता और निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति माँ की महिमा का वर्णन शब्दों में संभव नहीं।
महिलाओं द्वारा मुख्य अतिथि श्रीमती शालिनी चेतल को बुके एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सदस्यों ने अपनी माताओं से जुड़े संस्मरण साझा किए। डॉ. दीप पूनिया ने कहा कि उनकी माँ के संस्कारों और सही निर्णयों ने ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। श्रीमती राज गर्ग ने कहा—
“दुनिया के सारे पकवान एक तरफ,
माँ के हाथ की रोटी-दाल एक तरफ।”

श्री धर्मपाल ढुल्ल ने अपनी स्वरचित कविता में माँ के स्वरूप का भावपूर्ण चित्रण किया—
“करुणा-ममता उसकी न्यारी,
वह दया की चादर है।
जीवन शक्ति का स्रोत बड़ा,
माँ अमृत की गागर है।”
डॉ. एम. एस. मलिक और श्री अजीत सिंह ने प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राणा की भावुक पंक्तियाँ सुनाकर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
डॉ. डांग ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं, उसका श्रेय उनकी माँ को जाता है। उन्होंने बताया कि उनकी माँ सदैव उन्हें जरूरतमंदों की सहायता और समाजसेवा के लिए प्रेरित करती थीं।
कार्यक्रम के दौरान मातृत्व विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। किसी ने माँ पर गीत प्रस्तुत किया तो किसी ने कविता और संस्मरणों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में श्रीमती इंद्रा सांगवान, डॉ. सुनीता महतानी एवं डॉ. दीप पूनिया को “सुपर माँ” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुख्य अतिथि श्रीमती शालिनी चेतल द्वारा प्रदान किया गया।
अपने संबोधन में श्रीमती शालिनी चेतल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रतिदिन मातृ एवं पितृ दिवस होता है। उन्होंने कहा, “माँ हमारी पहली गुरु होती है। वह हमारे जीवन को संवारती, सजाती और सही दिशा देती है। माँ का ऋण कोई कभी नहीं चुका सकता।” उन्होंने वानप्रस्थ संस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
क्लब के प्रधान डॉ. एस. के. अग्रवाल ने मातृ दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी अपनी माताओं के ऋणी हैं और मातृशक्ति को शत-शत नमन करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
समापन पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से जलपान किया और मातृ दिवस की मधुर स्मृतियों को अपने साथ संजोया।









