ऑक्सफोर्ड, यूनेस्को और वर्ल्ड बैंक की टीमों ने गुरुग्राम सहित 4 जिलों के स्कूलों का किया दौरा, तकनीक और डेटा आधारित शिक्षा मॉडल की सराहना

गुरुग्राम, 7 मई। हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था ने बुधवार को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान कायम की, जब ‘South-South Learning Symposium’ के तहत दुनिया के 8 देशों के शिक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के सरकारी स्कूलों का दौरा कर ‘निपुण हरियाणा मिशन’ की जमीनी हकीकत को करीब से देखा।
प्रतिनिधिमंडल में दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, रवांडा, घाना, केन्या, तंजानिया, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम के प्रतिनिधि शामिल रहे। वहीं UNESCO, UNICEF, World Bank तथा University of Oxford के विशेषज्ञों ने भी इस शैक्षिक अध्ययन दौरे में भाग लिया।
प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर और सोनीपत के चयनित सरकारी स्कूलों में जाकर यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार हरियाणा ने प्राथमिक शिक्षा को तकनीक, डेटा और फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से नई दिशा दी है।
डिजिटल शिक्षा मॉडल ने खींचा वैश्विक ध्यान

दौरे के दौरान विदेशी विशेषज्ञों ने हरियाणा के डिजिटल इकोसिस्टम और ‘निपुण हरियाणा मिशन’ के अंतर्गत विकसित विभिन्न ऐप आधारित मॉडलों की विशेष सराहना की।
विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के माध्यम से देखा कि किस प्रकार ‘निपुण मेंटर ऐप’ के जरिए मेंटर कक्षाओं में बच्चों का स्पॉट असेसमेंट करते हैं और उसका डेटा तुरंत राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर अपडेट हो जाता है।
इसके अलावा ‘निपुण टीचर ऐप’ में उपलब्ध डिजिटल टूलकिट, लेसन प्लान और गतिविधि आधारित शिक्षण प्रणाली को भी प्रतिनिधिमंडल ने आधुनिक और प्रभावी बताया।
‘निपुण पैरेंट्स ऐप’ ने विदेशी मेहमानों को विशेष रूप से प्रभावित किया। प्रतिनिधियों ने आश्चर्य जताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने बच्चों की पढ़ाई की रियल-टाइम प्रगति देख पा रहे हैं।
वहीं क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) नेटवर्क को स्कूलों के बीच समन्वय और ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।
स्कूलों में दिखी गतिविधि आधारित शिक्षा

प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम के सेक्टर-43 और सेक्टर-44 स्थित कन्हई स्कूल, रोहतक के खरावड़, झज्जर के बालौर तथा सोनीपत के कबीरपुर स्कूलों का दौरा किया।
यहाँ विशेषज्ञों ने देखा कि किस प्रकार लकड़ी के खिलौनों, गतिविधि कार्ड्स, कहानियों और टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल (TLM) के माध्यम से बच्चों को गणित और भाषा की शिक्षा दी जा रही है।
स्कूलों में विकसित ‘प्रिंट रिच एनवायरनमेंट’ यानी शिक्षण सामग्री से सजी दीवारों और शिक्षण कोनों को देखकर विदेशी प्रतिनिधियों ने कहा कि “यहाँ का हर कोना बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करता है।”
“हरियाणा ने दुनिया को रास्ता दिखाया”
दौरे के बाद तंजानिया और घाना के प्रतिनिधियों ने कहा कि हरियाणा का डेटा आधारित शिक्षण मॉडल और FLN (Foundational Literacy and Numeracy) पर फोकस अत्यंत प्रभावशाली है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि वे यहाँ यह समझने आए थे कि बड़े स्तर पर शिक्षा में परिवर्तन कैसे संभव है और हरियाणा ने इस दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत किया है।
शिक्षा क्षेत्र में हरियाणा की उपलब्धियाँ

राज्य सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 तक हरियाणा में 35 हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षकों को FLN प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रदेश के 8,600 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में ऐप आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जा चुकी है, जबकि 8 लाख से अधिक विद्यार्थियों का डिजिटल असेसमेंट रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दो वर्षों में लर्निंग आउटकम में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
“निपुण मिशन बच्चों के भविष्य का संकल्प” : मनोज कुमार लाकड़ा
गुरुग्राम में निपुण मिशन के सफल संचालन का नेतृत्व कर रहे जिला कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार लाकड़ा ने प्रतिनिधिमंडल को मिशन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि “निपुण हरियाणा मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। हमने तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के बीच ऐसा पुल तैयार किया है, जहाँ हर बच्चे की सीखने की गति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने बताया कि पहले शिक्षक और अभिभावकों के बीच संवाद की कमी थी, लेकिन ‘निपुण पैरेंट्स ऐप’ ने इस दूरी को समाप्त कर दिया है।
मनोज कुमार लाकड़ा ने कहा कि अब निर्णय अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि ऐप आधारित सटीक आंकड़ों के आधार पर लिए जा रहे हैं। यदि किसी स्कूल में गणित या भाषा का स्तर गिरता है, तो उसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है और समय रहते हस्तक्षेप किया जाता है।
ये अंतरराष्ट्रीय हस्तियाँ रहीं मौजूद
इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक दौरे में घाना से एरिक अमोआ, रवांडा से जीन क्लाउड हशाकीनेजा, केन्या से डेबोरा किमथी एवं फ्रेडरिक ओब्वोयेरे मुजुम्बा, ब्रिटिश काउंसिल से अकोर्फा डॉसन और ग्लेन एलीज, यूनाइटेड किंगडम से डेवेलिन थॉम्पसन, NCERT से डॉ. संध्या, SPIU पंचकूला से रूपला सक्सेना, स्नेहा बिष्ट, राजीव ढुल और उर्वशी सहित अनेक अधिकारी एवं शिक्षा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वैश्विक स्तर के विशेषज्ञों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि ‘निपुण हरियाणा मिशन’ अब केवल एक राज्य स्तरीय पहल नहीं, बल्कि विश्व शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।









