फरीदाबाद में मजदूरों के हक की आवाज बुलंद, पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को बताया नाकाफी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

10 साल बाद बढ़ी मजदूरी को बताया अपर्याप्त, कहा— महंगाई के मुकाबले राहत नाममात्र

दिल्ली-NCR जैसी पाबंदियां झेलने वाले फरीदाबाद के मजदूरों को दिल्ली के बराबर वेतन देने की मांग

उप श्रम आयुक्त कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, न्यूनतम वेतन कानून सख्ती से लागू करने की उठाई मांग

फरीदाबाद, 07 मई 2026: एनआईटी-86 से पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में की गई वृद्धि को “ऊंट के मुंह में जीरा” बताते हुए इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने आज उप श्रम आयुक्त कार्यालय, फरीदाबाद पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और मजदूरों के हितों की रक्षा की मांग उठाई।

पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार का मजदूरों के प्रति रवैया कभी भी सकारात्मक नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूनतम मजदूरी में यह मामूली वृद्धि लगभग 10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद की गई है, जबकि नियमों के अनुसार हर पांच वर्ष में इसका संशोधन होना चाहिए था। उन्होंने बताया कि उन्होंने विधानसभा के भीतर भी कई बार न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग उठाई थी।

ज्ञापन सौंपते समय उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में मजदूरों के बीच इस बढ़ोतरी को लेकर भारी नाराजगी है। कई स्थानों पर श्रमिकों को तय न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि न्यूनतम मजदूरी कानून को सख्ती से लागू कराया जाए ताकि मजदूरों का शोषण रोका जा सके।

नीरज शर्मा ने विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि फरीदाबाद के मजदूरों को प्रदूषण नियंत्रण के दौरान लागू होने वाली ग्रेप (GRAP) पाबंदियों का पूरा असर झेलना पड़ता है। जब फरीदाबाद दिल्ली-एनसीआर की सभी शर्तों और प्रतिबंधों का हिस्सा है, तो यहां के मजदूरों को दिल्ली के समान वेतन क्यों नहीं मिलना चाहिए?

उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अकुशल श्रमिकों के लिए ₹15,220.71 प्रतिमाह की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की है, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों में पेट्रोल, दूध, खाद्यान्न और कपड़ों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दोगुने से अधिक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में यह वृद्धि बेहद अपर्याप्त साबित हो रही है।

पूर्व विधायक ने कहा कि फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे औद्योगिक शहरों में रहने वाले लाखों प्रवासी मजदूर भारी मकान किराया और बढ़ती महंगाई के बीच इस वेतन में अपना जीवनयापन नहीं कर सकते। उन्होंने सरकार से मांग की कि महंगाई दर के आधार पर मजदूरी में स्वतः संशोधन (Automatic Revision) की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!