महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: विद्रोही ने हरियाणा महिला आयोग पर साधा निशाना

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रेनू भाटिया पर असत्य बयानबाजी और राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप, भाजपा पर भी साधा तीखा प्रहार

रेवाडी, 27 अप्रैल 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रेनू भाटिया असत्य बयान देकर न केवल महिलाओं को गुमराह कर रही हैं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था को भी “औछी और गंदी राजनीति” में घसीट रही हैं।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में रेनू भाटिया अब तक असफल साबित हुई हैं। उनका कहना है कि वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय अपने पद का उपयोग राजनीतिक हित साधने के लिए कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में महिला अत्याचारों के मामलों पर आयोग की निष्क्रियता स्पष्ट दिखाई देती है और आयोग सरकार व प्रशासन की “चापलूसी” में लगा हुआ है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर विद्रोही ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 आज भी प्रभावी कानून है और संविधान का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि 16 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह कानून लागू है। ऐसे में कांग्रेस-विपक्ष द्वारा इसे गिराने का आरोप “पूरी तरह भ्रामक” है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में जो 131वां संविधान संशोधन गिरा है, वह महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं, बल्कि परिसीमन से संबंधित था। विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर “झूठ फैलाकर” महिलाओं को गुमराह कर रही है और दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि संवैधानिक संस्थाएं भी इस कथित दुष्प्रचार का हिस्सा बन रही हैं।

इसके साथ ही विद्रोही ने भाजपा की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल और चौधरी बंसीलाल के प्रति प्रयोग की गई कथित अभद्र भाषा नारी गरिमा के विपरीत है और सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं को ठेस पहुंचाती है।

विद्रोही ने यह भी कहा कि जिन नेताओं के परिवारजनों का संबंध भाजपा से है, वे भी अपने पूर्वजों के अपमान पर मौन साधे हुए हैं। उन्होंने इसे “अवसरवादिता और सत्ता-लिप्सा की पराकाष्ठा” बताया।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कड़ी ही नहीं, बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया देते हुए कुलदीप बिश्नोई, भव्य बिश्नोई तथा किरण चौधरी-श्रुति चौधरी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता “अपने पूर्वजों के नाम पर राजनीति की दुकान चला रहे हैं”, लेकिन जब उन्हीं पूर्वजों—स्व. चौधरी भजनलाल और स्व. चौधरी बंसीलाल—का सार्वजनिक अपमान होता है, तब ये “सुविधाजनक चुप्पी” ओढ़ लेते हैं।

विद्रोही ने इसे सिर्फ शर्मनाक ही नहीं, बल्कि “राजनीतिक गिरावट और चरित्रहीनता की पराकाष्ठा” बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता के लालच में ये नेता अपने ही बाप-दादाओं के सम्मान को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हट रहे। “एक तरफ उनके नाम पर वोट मांगो, दूसरी तरफ उनके अपमान पर मुंह सिल लो—इससे बड़ा पाखंड क्या हो सकता है,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा।

उन्होंने आगे जोड़ा कि यह रवैया दर्शाता है कि इन नेताओं के लिए न तो पारिवारिक विरासत का कोई सम्मान बचा है और न ही सार्वजनिक जीवन की कोई नैतिकता—सिर्फ सत्ता से चिपके रहना ही उनका एकमात्र उद्देश्य रह गया है।

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Author: Bharat Sarathi

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