जीएमडीए ने मानसून तैयारियों को तेज किया; सीईओ पी.सी. मीणा ने प्रमुख स्थलों का किया निरीक्षण

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-ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने और जलभराव की समस्या से निपटने पर विशेष फोकस

-प्रमुख स्टॉर्म वाटर ड्रेन लेग-4, ताऊ देवी लाल स्टेडियम के पास बॉक्स ड्रेन तथा सीईटीपी मानेसर चैनल, लेग-4 और लेग-3 ड्रेनों के एकीकरण का कार्य 15 मई से पहले पूरा करने के निर्देश

-मास्टर सड़कों के अतिरिक्त रोड गली (नालियां) विकसित की जाएंगी

-मानसून के दौरान रोड गलियों को साफ रखने के लिए मेनपॉवर की तैनाती

-मानसून शुरू होने से पहले सभी स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज कार्यों को पूरा करने पर जोर

गुरुग्राम, 21 अप्रैल: मानसून तैयारियों को मजबूत करने और शहर को जलभराव मुक्त बनाने के उद्देश्य से, जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने सोमवार को गुरुग्राम के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर व्यापक निरीक्षण किया। इन निरीक्षणों का उद्देश्य गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) द्वारा चलाए जा रहे जल निकासी और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था।

निरीक्षण के दौरान, जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी चल रहे कार्यों को समयबद्ध तरीके से तेज़ी से पूरा किया जाए, ताकि आगामी मानसून के दौरान जन-सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और जल निकासी व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

ताऊ देवीलाल स्टेडियम और राजीव चौक पर, जहां एक प्रमुख स्टॉर्म वाटर ड्रेन का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कार्य की समीक्षा की और बताया कि यह परियोजना मेदांता रोड और आसपास के क्षेत्रों में बरसाती पानी के सुचारु प्रवाह के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ड्रेनेज नेटवर्क भारी वर्षा के दौरान इस प्रमुख मार्ग पर जलभराव की समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि कार्य की गति बढ़ाई जाए ताकि मानसून शुरू होने से पहले इसे समय पर पूरा कर कार्यशील बनाया जा सके। उन्होंने आगे निर्देश दिए कि मास्टर रोड पर प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त और मजबूत रोड गली (नालियां) का निर्माण किया जाए, ताकि वर्षा जल का तेजी से ड्रेनेज सिस्टम में निकासी सुनिश्चित हो सके।

जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने सेंट्रल पेरिफेरल रोड (सीपीआर) पर स्थित 6.5 किलोमीटर लंबे आरसीसी बॉक्स ड्रेन की डीसिल्टिंग के कार्य की भी समीक्षा की। यह ड्रेन एनपीआर/एसपीआर क्लोवरलीफ जंक्शन से लेकर सेक्टर 37डी तक फैला हुआ है और वाटिका चौक से शुरू होने वाले लेग-4 से जुड़ेगा। यह परियोजना जीएमडीए द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य बरसाती पानी का नजफगढ़ नाले की ओर सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करना तथा दक्षिणी पेरिफेरल रोड (एसपीआर) और द्वारका एक्सप्रेसवे के सेक्टरों में जलभराव की समस्या को कम करना है। मीणा ने निर्देश दिए कि डीसिल्टिंग का कार्य मानसून शुरू होने से काफी पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि इसकी प्रभावशीलता को अधिकतम किया जा सके।

सेक्टर 37डी में, उन्होंने लेग-3 और लेग-4 मास्टर स्टॉर्मवॉटर नालों को मानेसर नाले से जोड़ने के लिए चल रहे इस महत्वपूर्ण कार्य का निरीक्षण किया। इस कार्य से बरसाती पानी का निर्बाध प्रवाह भविष्य में लेग-3 में हो सेकगा। उन्होंने लेग-4 नाले की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को राहत प्रदान करने के लिए निर्माण कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिए।

धनकोट के निकट लेग-3 ड्रेन के निरीक्षण के दौरान, जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एसटीपी चैनल में सीवर के अवैध प्रवाह पर गंभीर संज्ञान लिया। उन्होंने ऐसे अवैध प्रवाह को तत्काल मोड़ने के निर्देश दिए और यह सुनिश्चित करने को कहा कि केवल उपचारित (ट्रीटेड) पानी ही सिंचाई-सह-एसटीपी चैनल के माध्यम से झज्जर की ओर प्रवाहित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के प्रदूषण के स्रोत को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) पर एरेटर स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाकर जल गुणवत्ता में सुधार किया जा सके, पीएच संतुलन बनाए रखा जा सके और जैविक उपचार प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाया जा सके।

जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने नरसिंहपुर का भी दौरा किया, जहां जीएमडीए द्वारा नरसिंहपुर सर्विस लेन से बरसाती पानी को बादशाहपुर नाले की ओर प्रवाहित करने के लिए ड्रेन निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एनएचएआई के अध्यक्ष के साथ स्थल पर चर्चा की ताकि एनएच-48 पर बेहतर जल निकासी प्रबंधन के लिए एक पुलिया का निर्माण किया जा सके।

मीणा ने निवासियों के लिए परेशानी मुक्त मानसून सुनिश्चित करने की जीएमडीए की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, सभी जल निकासी कार्यों में तेजी लाने, डी-सिल्टिंग के अभियानों को तेज करने और मुख्य सड़कों के किनारे रोड गली (नालियों) के निर्माण को प्राथमिकता देने के सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि ये उपाय बरसाती पानी के त्वरित निकास को सुनिश्चित करने, जलभराव को रोकने और बरसात के मौसम में यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इससे पहले सोमवार सुबह, जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने जीएमडीए कार्यालय में एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें शहर के जल निकासी ढांचे को मजबूत और बेहतर बनाने से संबंधित चल रहे कार्यों का जायजा लिया गया। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और प्रमुख परियोजनाओं—जैसे ड्रेन निर्माण, डी-सिल्टिंग कार्य, स्टॉर्म वाटर नेटवर्क के विस्तार तथा जलभराव संभावित क्षेत्रों की पहचान—की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान ड्रेनेज प्रणाली की दक्षता बढ़ाने, कार्यों को समय पर पूरा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई, ताकि जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने मानसून से पहले गुरुग्राम को बाढ़ से सुरक्षित और तैयार बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए कड़ी निगरानी, समय-सीमा का पालन और पर्याप्त मेनपॉवर और मशीनरी की तैनाती की आवश्यकता पर जोर दिया।

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Author: Bharat Sarathi

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